August 25, 2026

आरक्षण की लॉटरी ने बदले बांसवाड़ा के सियासी समीकरण, 25 साल में हर बार नया चेहरा

बांसवाड़ा: राजस्थान के बांसवाड़ा शहर के नगरीय निकाय का इतिहास बेहद दिलचस्प और राजनीतिक उथल-पुथल से भरा रहा है। आजादी के पहले वर्ष 1904 में स्थापित इस नगर पालिका को साल 2012 में नगर परिषद का दर्जा मिला था। निकाय के इतिहास में अब तक केवल दो ही ऐसे अवसर आए हैं जब अलग-अलग अवधियों में एक ही व्यक्ति दो बार निकाय प्रमुख की कुर्सी पर बैठा हो। वहीं, पिछले छह चुनावों से लॉटरी प्रणाली के जरिए तय होने वाली आरक्षण व्यवस्था के कारण किसी भी पुराने अध्यक्ष या सभापति को दोबारा इस पद पर लौटने का मौका नहीं मिल पाया है।

इतिहास के पन्नों में दर्ज दो-दो बार अध्यक्ष रहे चेहरे

आजादी के बाद वर्ष 1948 में करण सिंह कोठारी बांसवाड़ा नगर पालिका के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 1948 से लेकर 1981-82 के बीच सवाईलाल गुप्ता और दिनकरलाल मेहता ऐसे दो प्रमुख नाम रहे जिन्होंने अलग-अलग कार्यकाल में दो बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। सवाईलाल गुप्ता का पहला कार्यकाल करीब 6 साल 11 महीने से अधिक का रहा, जबकि दिनकरलाल मेहता ने भी दो अलग-अलग अवधियों में नगर की कमान संभाली। इसके अलावा, तत्कालीन पालिकाध्यक्ष छगनलाल नेमा का कार्यकाल भी लगभग 6 साल 11 महीने का रहा था। बांसवाड़ा निकाय के इतिहास में दो बार (1971 और 1999 में) कार्यवाहक अध्यक्ष की व्यवस्था भी देखने को मिली है।

लॉटरी और बदलते आरक्षण के समीकरण

वर्ष 1994 के बाद से हुए नगरीय निकाय चुनावों में आरक्षण की लॉटरी पद्धति ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए। यही कारण है कि पिछले छह चुनावों में कोई भी पूर्व अध्यक्ष या सभापति दोबारा इस पद तक नहीं पहुंच सका। इन चुनावों में निकाय प्रमुख की सूची इस प्रकार रही है:

  • 1994: मणिलाल बोहरा (अध्यक्ष)

  • 1999: उमेश पटियात (अध्यक्ष)

  • 2004: कृष्णा कटारा (अध्यक्ष)

  • 2009: राजेश टेलर (सभापति)

  • 2014: मंजूबाला पुरोहित (सभापति)

  • 2019: जैनेन्द्र त्रिवेदी (सभापति)

महिलाओं के हाथों में रही निकाय की कमान

बांसवाड़ा के नगरीय निकाय इतिहास में अब तक दो बार महिलाओं ने भी शीर्ष पद संभाला है। कृष्णा कटारा 2004 से 2009 तक नगर पालिका की पहली महिला अध्यक्ष रहीं, जो बाद में जिला परिषद सदस्य भी बनीं। इसके बाद, मंजूबाला पुरोहित ने 2014 से 2019 तक पहली महिला सभापति के रूप में निकाय की कमान संभाली।

इस बार एसटी वर्ग से होगा नया सभापति

आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था के तहत बांसवाड़ा के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब शहर को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से संबंधित सभापति मिलेगा। इस नए आरक्षण प्रावधान के चलते पुराने और स्थापित राजनीतिक चेहरों के बजाय नए दावेदारों के मैदान में आने की पूरी संभावना है, जिससे आगामी चुनावों का राजनीतिक रोमांच काफी बढ़ गया है।