August 25, 2026

समुद्र की लहरों में छिपी ऊर्जा का होगा इस्तेमाल, बिजली बनाने वाली खास डिवाइस तैयार

नई दिल्ली। बिजली के उत्पादन के लिए आपने सामान्य तौर पर सोलर पैनल और विंड टर्बाइन के बारे में तो अवश्य सुना होगा, लेकिन अब समुद्र की लहरों से भी बिजली का उत्पादन करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एक विशेष प्रकार की तकनीक विकसित की गई है, जिसे 'वेव एनर्जी कन्वर्टर' यानी WEC कहा जाता है। यह अनूठी डिवाइस समुद्र की लहरों की गति को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने का कार्य करती है, और वर्तमान में चीन इस उन्नत तकनीक पर बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।

जानिए कैसे बनती है समुद्र की लहरों से बिजली

सरल शब्दों में समझें तो जब समुद्र की लहरें ऊपर और नीचे उठती हैं, तो उनमें अपार ऊर्जा निहित होती है। WEC डिवाइस इसी ऊर्जा को कैप्चर करने का काम करती है। इस उपकरण का एक हिस्सा लहरों के साथ गति करता है, और इस मूवमेंट को मैकेनिकल या हाइड्रोलिक प्रणालियों के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने वाले जनरेटर तक पहुंचाया जाता है।

कुछ विशेष उपकरणों में लहरों के प्रभाव से टर्बाइन घूमती हैं, जबकि अन्य डिवाइस पानी के साथ ऊपर-नीचे या आगे-पीछे होने वाली संरचनाओं का उपयोग करती हैं। यद्यपि इन वेव एनर्जी कन्वर्टर्स के डिजाइन भिन्न हो सकते हैं, परंतु सबका मूल उद्देश्य समुद्र की लहरों की इस प्राकृतिक ऊर्जा को बिजली में बदलना ही है।

चीन द्वारा निर्मित विशाल वेव एनर्जी कन्वर्टर

चीन में WEC तकनीक को लेकर उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें 'नानकुन' नामक एक अत्यंत विशाल डिवाइस भी शामिल है। इस भारी-भरकम उपकरण का वजन लगभग 6,000 टन आंका गया है, और इसकी उत्पादन क्षमता एक दिन में 24,000 kWh तक बिजली पैदा करने की है। यह मात्रा लगभग 3,500 घरों की दैनिक बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के बराबर मानी जाती है। यही कारण है कि वेव एनर्जी को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब तक अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्य रूप से सौर और पवन ऊर्जा पर ही अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था, परंतु समुद्र की लहरों में भी ऊर्जा का एक विशाल भंडार मौजूद है।

सोलर और विंड एनर्जी से किस प्रकार भिन्न है यह तकनीक

सोलर पैनल को कार्य करने और बिजली बनाने के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है, जबकि विंड टर्बाइन पूरी तरह से हवा की गति पर निर्भर करती हैं। इसके विपरीत, WEC तकनीक समुद्र की लहरों की गतिशीलता का उपयोग करती है। चूंकि समुद्र का पानी हवा की तुलना में काफी सघन और भारी होता है, इसलिए इसकी लहरों में बहुत अधिक ऊर्जा संचित होती है। हालांकि, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि इस ऊर्जा को बिजली में बदलना एक बेहद आसान प्रक्रिया है; इसके लिए उपयुक्त भौगोलिक स्थिति, सटीक डिजाइन और बेहद मजबूत इंजीनियरिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है।

चीन में विकसित की जा रही इस वेव एनर्जी कन्वर्टर तकनीक में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर पूरी तरह सफल हो जाती है, तो आने वाले समय में समुद्र भी क्लीन एनर्जी का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभर सकता है। भविष्य में बिजली के उत्पादन के लिए केवल सूर्य और पवन ऊर्जा ही नहीं, बल्कि समुद्र की लहरों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाएगी।