October 1, 2026

भारत-वेस्टइंडीज मैच में रिकॉर्ड रन, लेकिन गंभीर ने कहा- गेंदबाजों को भी मौका मिलना चाहिए

गुवाहाटी में खेले गए रोमांचक मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) मैच में 406 रनों के विशाल लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा कर एक नया इतिहास रच दिया है। बल्लेबाजों के दृष्टिकोण से यह मैच बेहद यादगार और रिकॉर्ड बुक में दर्ज होने वाला रहा, परंतु भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मैच के बाद आधुनिक क्रिकेट की पिचों और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच एक संतुलित और बराबरी का मुकाबला होना बेहद आवश्यक है।

बल्ला बनाम गेंद का संतुलन और कोच गंभीर की चिंता

मैच के बाद एक स्पोर्ट्स चैनल से बातचीत करते हुए मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कहा कि यदि पूरी ईमानदारी से बात की जाए, तो आज के समय में क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे विशुद्ध क्रिकेट नहीं कहा जा सकता, यह केवल बल्लेबाजी का प्रदर्शन बनकर रह गया है। कल्पना कीजिए कि जब कोई युवा गेंदबाज ऐसी सपाट पिचों पर गेंदबाजी करने उतरता है और विरोधी टीम बोर्ड पर 400 रन टाँग देती है, जिसके जवाब में उनकी अपनी टीम भी 400 रन बना लेती है। रिकॉर्ड बुक, दर्शकों और प्रसारकों के लिहाज से यह भले ही बेहद रोमांचक और शानदार लगे, लेकिन एक सच्चे क्रिकेट प्रेमी और कोच के रूप में उन्हें गेंदबाजों की इस लाचारी पर उनके प्रति गहरी सहानुभूति महसूस होती है।

गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं और आंकड़ों का सच

गौतम गंभीर ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में गेंदबाजों के लिए कुछ भी मददगार नहीं होता, जिससे उनके वास्तविक कौशल का सही आकलन करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिचों पर गेंदबाजों के लिए भी कुछ ऐसी मदद या गुंजाइश होनी चाहिए, जिससे वे मैच में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। केवल मैच के अंत में स्कोरबोर्ड पर दिखने वाले खराब गेंदबाजी आंकड़ों को आधार बनाकर किसी गेंदबाज को कटघरे में खड़ा कर देना बिल्कुल गलत है।

कोच ने समझाया कि अक्सर ऐसा प्रतीत होता है कि गेंदबाज ने बहुत खराब गेंदबाजी की है, जबकि वास्तविकता यह होती है कि आधुनिक नियमों (जैसे पांच फील्डर सर्किल के अंदर होना और दो नई गेंदों का इस्तेमाल) और तूफानी पावर-हिटिंग के दौर में गेंदबाजों के पास रक्षात्मक विकल्प बेहद सीमित रह जाते हैं। इसलिए कोचिंग स्टाफ सबसे पहले यह परखता है कि गेंदबाज ने अपनी तय रणनीतिक योजना को मैदान पर कितनी अच्छी तरह लागू किया। यदि गेंदबाज ने अपनी योजना के अनुसार गेंदबाजी की है, तो उनके आंकड़ों को देखकर उन पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

विश्व कप की तैयारी और सीमित समय का समीकरण

वर्ष 2027 में होने वाले आगामी वनडे विश्व कप में अब भले ही लगभग एक वर्ष का समय शेष बचा हो, लेकिन गंभीर के अनुसार टीम के पास प्रयोग करने और खिलाड़ियों को परखने के लिए उतना समय उपलब्ध नहीं है जितना दूर से दिखाई देता है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और आगामी भारत-ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला जैसी व्यस्तताओं के कारण बीच का अधिकांश समय निकल जाएगा। इस सीरीज के बाद भारतीय टीम के पास बमुश्किल 20 वनडे मुकाबले ही शेष बचेंगे, जिसमें श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली श्रृंखलाएँ भी शामिल हैं। कोच का मानना है कि समय बहुत कम है, इसलिए प्रबंधन को जो भी रणनीतिक विकल्प तैयार करने हैं, उन्हें जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाना होगा।

दबाव की परिस्थितियों में युवाओं को आजमाने की रणनीति

युवा तेज गेंदबाज आकीब नबी को सीरीज में 1-0 की बढ़त के दौरान डेब्यू का मौका दिए जाने पर बात करते हुए गंभीर ने स्पष्ट किया कि क्यों ऐसे चुनौतीपूर्ण मौकों पर नए खिलाड़ियों को उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व कप के दौरान मैदान पर दबाव का स्तर बेहद अलग और उच्च कोटि का होता है, इसलिए खिलाड़ियों को पहले से ही वैसी ही विकट परिस्थितियों में तैयार करना आवश्यक है।

यदि आकीब को किसी 'डेड रबर' (जिसका सीरीज पर असर न पड़े) मैच में उतारा जाता, तो वह दबाव देखने को नहीं मिलता जो रोमांचक और कड़े मुकाबलों में होता है। एक अन्य युवा गेंदबाज गुनूर बरार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती दस ओवरों या डेथ ओवरों जैसी कठिन परिस्थितियों में गेंदबाजी करने से ही खिलाड़ी निखरते हैं। भले ही ऐसे मौकों पर उनके आंकड़े शुरुआती दौर में महंगे नजर आएँ, लेकिन दबाव के पलों का सामना करने से अंततः भारतीय क्रिकेट का भविष्य ही मजबूत होगा।