बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। 2020 के लद्दाख गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में इस मुलाकात को एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
यहाँ इस मुलाकात और रक्षा मंत्री के दौरे की मुख्य बातें दी गई हैं:
भारत-चीन रक्षा मंत्रियों की मुलाकात: क्षेत्रीय स्थिरता और शांति पर जोर
बिश्केक: मंगलवार को SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों ने आमने-सामने बैठकर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश सीमा विवाद के बाद धीरे-धीरे विश्वास बहाली (Trust Building) की ओर बढ़ रहे हैं।
1. वार्ता के मुख्य बिंदु
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क्षेत्रीय सुरक्षा: दोनों नेताओं ने एशिया महाद्वीप की वर्तमान सुरक्षा स्थिति और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
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सकारात्मक रुख: राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को सुखद बताया, वहीं रक्षा विशेषज्ञों ने इसे 'सकारात्मक और रचनात्मक' करार दिया है।
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आपसी सहयोग: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई गई।
2. लद्दाख विवाद के बाद के संदर्भ में महत्व
2020 में पूर्वी लद्दाख (LAC) पर हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था।
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हालांकि, हाल के वर्षों में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर हुई कई दौर की वार्ताओं के बाद स्थिति में सुधार हुआ है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि बिश्केक में हुई यह उच्चस्तरीय मुलाकात चीन और भारत के बीच 'विश्वास की कमी' (Trust Deficit) को पाटने का काम करेगी।
3. राजनाथ सिंह के बिश्केक दौरे के अन्य कार्यक्रम
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शहीदों को नमन: बैठक से पहले रक्षा मंत्री ने बिश्केक के विक्ट्री स्क्वायर पहुंचकर शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की।
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भारतीय समुदाय से संवाद: अपने दौरे के दौरान राजनाथ सिंह किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात करेंगे।
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द्विपक्षीय बैठकें: राजनाथ सिंह SCO के अन्य सदस्य देशों (जैसे रूस, उज्बेकिस्तान आदि) के रक्षा मंत्रियों के साथ भी अलग से मुलाकात कर रहे हैं ताकि रक्षा सहयोग को विस्तार दिया जा सके।
क्यों अहम है यह दौरा?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत मंच है। भारत इस मंच के माध्यम से अपनी "जीरो टॉलरेंस ऑन टेरर" की नीति को वैश्विक स्तर पर रख रहा है। साथ ही, चीन के साथ इस स्तर की बातचीत यह संकेत देती है कि भारत विवादों को कूटनीतिक चर्चा के जरिए सुलझाने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने का पक्षधर है।

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