नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को पार्टी ने मांग की कि सरकार को बिना किसी देरी के सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर ही महिला कोटा लागू करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
जयराम रमेश का तीखा प्रहार: "नाकाम हुई पीएम की चाल"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव अभियान समाप्त होने के बाद अब प्रधानमंत्री को अपने "राजनीतिक एजेंडे" से बाहर निकलकर महिलाओं को वास्तविक न्याय देना चाहिए।
कांग्रेस की मुख्य आपत्तियां और मांगें:
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तत्काल प्रभाव से लागू हो कोटा: कांग्रेस का तर्क है कि आरक्षण के लिए परिसीमन (Delimitation) का इंतजार करना अनावश्यक है। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही मौजूदा सीटों पर प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
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अधिसूचना पर सवाल: रमेश ने आरोप लगाया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023' को 16 अप्रैल 2026 की रात बेहद जल्दबाजी और घबराहट में अधिसूचित किया गया था।
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पापों का प्रायश्चित: पार्टी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश की महिलाओं का उपयोग किया है, और अब उन्हें इसका "प्रायश्चित" करना चाहिए।
परिसीमन बनाम महिला न्याय: विपक्ष का आरोप
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि सरकार का असली मकसद महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि इसके पीछे 'परिसीमन' का एजेंडा थोपना है।
"संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण केवल एक मुखौटा था। असली खेल प्रधानमंत्री के राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए परिसीमन की बिसात बिछाना था।" — जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
मानसून सत्र के लिए अल्टीमेटम
विपक्ष ने मांग की है कि आगामी मानसून सत्र या उससे पहले सरकार एक नया संशोधन लाए, जिससे मौजूदा सीटों के भीतर ही महिलाओं के लिए कोटा सुनिश्चित हो सके। कांग्रेस का मानना है कि वर्तमान सीटों की संख्या के साथ आरक्षण देना पूरी तरह व्यावहारिक और संवैधानिक रूप से संभव है।

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