राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों से माफी मांगें प्रधानमंत्री

चेन्नई: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को अपने तमिलनाडु दौरे के दौरान नीट परीक्षा से जुड़ी धांधली और पेपर लीक के कारण अवसाद में आकर आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं के पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने युवाओं को 'क्षमा करने' का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि देश के होनहार विद्यार्थियों को किसी की दया या माफी की दरकार नहीं है, अपितु केंद्र सरकार का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह छात्रों के समक्ष संपूर्ण सत्य उजागर करे, उन्हें न्याय प्रदान करे और इस विफलता के लिए देश से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करे।

तमिलनाडु के पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक दबाव का उल्लेख

राहुल गांधी ने बताया कि अपने दौरे के क्रम में उन्होंने गोपिका, रोशिनी और वेत्री आनंदन के शोकाकुल स्वजनों से भेंट की। ये तीनों ही मेधावी विद्यार्थी नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने, अनिश्चितता और पुनः परीक्षा के आयोजन से उपजे अत्यधिक मानसिक तनाव को सहन नहीं कर सके और उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने कहा कि इन परिवारों का केवल एक ही बुनियादी प्रश्न है कि जब उनके बच्चों ने पूरी निष्ठा से अध्ययन किया था, तो उन्हें इस भ्रष्ट और नाकारा प्रशासनिक व्यवस्था का खमियाजा अपनी जान देकर क्यों चुकाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पुनः परीक्षा के चक्र ने लाखों अभ्यर्थियों को असहनीय अवसाद के गर्त में धकेल दिया है।

संवैधानिक और संस्थागत सुधारों हेतु कांग्रेस के भावी संघर्ष का खाका

पीड़ित परिजनों की व्यथा सुनने के उपरांत राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी देश में एक ऐसी पारदर्शी और निष्पक्ष शैक्षणिक प्रणाली स्थापित करने के लिए संघर्षरत है, जहाँ विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम का सम्मान हो और किसी भी संस्थागत नाकामी की वजह से किसी युवा को अपना जीवन न गंवाना पड़े। ममल्लापुरम में आयोजित संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी अभिभावक के लिए संतान को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता। देश में पेपर लीक और बार-बार रद्द होती परीक्षाओं ने युवाओं के भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है, जो यह दर्शाता है कि मौजूदा शिक्षा ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है।

प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर तीखी प्रतिक्रिया और विवाद की पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वक्तव्य का उत्तर देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेतृत्व को माफ करने की बात करने के बजाय सबसे पहले उन पीड़ित परिवारों से मिलना चाहिए था, जिनकी वर्षों की जमापूंजी, समय और बच्चों के सपने इस धांधली में नष्ट हो गए। उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक किशोरी द्वारा प्रयुक्त अभद्र भाषा के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर युवाओं को गुमराह बताते हुए उन्हें क्षमा करने की बात कही थी। इस पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत का छात्र वर्ग माफी का पात्र नहीं, बल्कि सरकार स्वयं उनसे क्षमा मांगे।