बेंगलुरु: कर्नाटक में पिछले कई दिनों से जारी मंत्रिमंडल के विस्तार की उत्सुकता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा प्रस्तावित नए मंत्रियों के नामों पर गहन विचार-विमर्श के पश्चात अपनी अंतिम सहमति प्रदान कर सकता है। उच्च पदस्थ दलीय सूत्रों के अनुसार मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है, यद्यपि इस सूची पर केंद्रीय कमान का औपचारिक अनुमोदन प्राप्त होना अभी शेष है। वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्तावित सूची के संदर्भ में राहुल गांधी के साथ विस्तृत परिचर्चा की है, जिसके उपरांत अंतिम निर्णय की घोषणा होने की संभावना बनी हुई है।
हाईकमान के पास पहुंची संभावितों की सूची और बेंगलुरु में शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मंत्रिपरिषद में सम्मिलित किए जाने के लिए 20 विधायकों की एक अंतरिम सूची तैयार करके केंद्रीय नेतृत्व को प्रेषित की है, जिस पर अंतिम निर्णय एक अन्य दौर की वार्ता के बाद लिया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारी के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला के सोमवार को स्वीकृत सूची के साथ बेंगलुरु पहुंचने की प्रबल संभावना है। उनके आगमन के साथ ही नए मंत्रियों के नामों के प्राधिकृत ऐलान और लोक भवन स्थित ग्लास हाउस में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के विस्तृत कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट हो जाएगी।
रिक्त पदों को भरने की रणनीति और क्षेत्रीय व जातीय संतुलन साधने का प्रयास
यह प्रस्तावित विस्तार शिवकुमार द्वारा सरकार की कमान संभालने के लगभग दो माह पश्चात हो रहा है, जहाँ पूर्व में गठित 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल के बाद भी 20 स्थान रिक्त रह गए थे। दलीय सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध 20 रिक्तियों में से 18 पदों पर नियुक्तियां की जा सकती हैं, जबकि शेष 2 पदों को भावी राजनीतिक आवश्यकताओं के दृष्टिकोण से सुरक्षित रखा जा सकता है। इस पुनर्गठन का मुख्य ध्येय राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को सुदृढ़ करना है, ताकि उन क्षेत्रों को भी सरकार में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके जो अब तक इससे वंचित रहे हैं।
नए चेहरों को प्राथमिकता के साथ पूर्ववर्ती दिग्गजों की वापसी की संभावना
संगठनात्मक सूत्रों के मुताबिक इस फेरबदल के माध्यम से बड़े स्तर पर नए और युवा प्रतिनिधियों को शासन में सहभागिता का अवसर प्रदान किए जाने की योजना है। इसके साथ ही पूर्ववर्ती सिद्धारमैया सरकार का हिस्सा रहे लगभग छह अनुभवी नेताओं की मंत्रिपरिषद में वापसी के संकेत भी मिल रहे हैं। सत्ता संभालने के बाद से ही अनेक विधायक मंत्री पद की दौड़ में शामिल थे, ऐसे में इस कदम से दलीय संतुलन और भावी राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद की जा रही है। शीर्ष नेतृत्व का औपचारिक निर्देश मिलते ही संपूर्ण कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

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