August 26, 2026

बदायूं में बवाल की पहले से थी तैयारी, प्रतिमा स्थापना को लेकर महिलाओं ने संभाला मोर्चा

बदायूं।उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हाल ही में हुए बवाल को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती आठ दिनों के भीतर चुपचाप तैयार की गई रणनीति के तहत प्रतिमा स्थापित करने के बहाने शरारती तत्व ग्रामीणों की भीड़ में शामिल हो गए थे। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी साजिश की भनक स्थानीय खुफिया तंत्र को भी नहीं लग पाई।

महिलाओं को आगे कर रची गई थी रणनीति

पुलिस की अब तक की गई जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध के जोखिम से बचने के लिए महिलाओं को मुख्य मोर्चे पर उतारा गया था। वायरल वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सड़क पर जाम लगाने और प्रदर्शन करने में महिलाएं ही आगे थीं। रामपुर के शाहबाद से करीब दो दिन पहले गुपचुप तरीके से गांव लाई गई प्रतिमा को सोमवार रात डेढ़ बजे सरकारी भूमि पर रखा गया था। प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी बहस करने के दौरान महिलाओं ने खराब मौसम और भूख-प्यास की भी परवाह नहीं की और पूरे दिन पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मोर्चा संभाले रखा।

पुलिस ने अफवाहों को किया खारिज

बवाल के दौरान आंबेडकर की प्रतिमा के खंडित किए जाने की खबरें भी उड़ीं, जिन्हें पुलिस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और अधिकारियों द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।

प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव और पथराव

प्रशासन की ओर से प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर रखवाने और नियमानुसार प्रस्ताव तैयार करने की बात पर ग्रामीण भड़क गए और उसी स्थान पर तुरंत स्थापना की जिद करने लगे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कई थानों की फोर्स के साथ पीएसी बल को बुलाना पड़ा। बातचीत के दौरान ही अंधेरा होते ही उपद्रवियों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया।

कई वाहन हुए क्षतिग्रस्त

हिंसा के दौरान हुए पथराव में पीएसी का ट्रक, दमकल वाहन, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कई थानों के प्रभारियों की गाड़ियों के अलावा दो निजी एंबुलेंस और दो मोटरसाइकिलें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। जिला अधिकारी अवनीश राय ने बताया कि प्रशासन लगातार नियमानुसार अनुमति लेकर प्रतिमा स्थापित करने की अपील कर रहा था, लेकिन उग्र भीड़ ने शाम के वक्त अचानक हमला कर दिया जिसमें कुछ कर्मचारियों को चोटें आई हैं। बवाल के बाद इलाके की दुकानें बंद करा दी गईं जिससे कुछ समय के लिए बाजार में सन्नाटा पसर गया था।