इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत जनरल असीम मुनीर देश के सबसे शक्तिशाली जनरल के रूप में उभरे हैं। उन्होंने बिना किसी सैन्य तख्तापलट या सड़कों पर टैंक उतारे, केवल संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से असीमित अधिकार हासिल कर लिए हैं। पाकिस्तान के 'चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज' (CDF) और थल सेनाध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी संभालने के बाद वह सैन्य कमान के निर्विवाद प्रमुख बन गए हैं।
27वें संविधान संशोधन से मिला 'सुपर बॉस' का दर्जा
शहबाज शरीफ सरकार द्वारा संसद से पारित 'डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026' और 'नेशनल कमांड अथॉरिटी (संशोधन) एक्ट 2026' पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुहर लग गई है। यह कानून 27वें संविधान संशोधन का हिस्सा हैं, जिसके तहत 'चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी' (CJCSC) का पद समाप्त कर 'चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज' (CDF) का नया पद बनाया गया। जनरल मुनीर देश के पहले सीडीएफ नियुक्त किए गए हैं। इस बदलाव के बाद वह थल, नौ और वायु सेना के सर्वोच्च कमांडर बन गए हैं तथा 2030 तक इस पद पर बने रहेंगे।
नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का गठन और नई नियुक्तियां
संवैधानिक बदलावों के तहत पाकिस्तान ने 'नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड' के नए 4-स्टार कमांडर पद का भी सृजन किया है। इसका उद्देश्य देश की रणनीतिक सेनाओं का परिचालन एकीकरण करना है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लेफ्टिनेंट जनरल आमिर रजा को 4-स्टार जनरल के पद पर पदोन्नत कर इस नए पद की कमान सौंपी है।
आलोचकों ने करार दिया 'संवैधानिक तख्तापलट'
पाकिस्तान के इतिहास में सेना ने चार बार प्रत्यक्ष तख्तापलट किया है, लेकिन इस बार कानूनी प्रक्रिया के जरिए सेना ने अपनी शक्ति का विस्तार किया है। राजनीतिक विश्लेषक और आलोचक इस 27वें संविधान संशोधन को 'संवैधानिक तख्तापलट' बता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे नागरिक सरकार पर सैन्य प्रभुत्व और गहरा हो गया है। उल्लेखनीय है कि इस संशोधन के तहत शीर्ष सैन्य अधिकारियों को आजीवन आपराधिक मुकदमों से पूर्ण छूट (इम्युनिटी) भी प्रदान की गई है।

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