पटना, । विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने आम जनमत पार्टी (एजेपी) को वित्तीय वर्ष 2023-24 में कथित तौर पर मिले करीब 620 करोड़ रुपये के चंदे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वीआईपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए एजेपी के पूर्व और वर्तमान नेतृत्व से चंदे के स्रोत तथा उसके इस्तेमाल का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने को कहा है। देव ज्योति ने एजेपी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनामिका पासवान और वर्तमान अध्यक्ष गौरव मिश्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस राजनीतिक दल की चुनावी और राजनीतिक सक्रियता सीमित रही है, उसके खाते में इतनी बड़ी राशि का पहुंचना कई गंभीर सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि इतनी बड़ी रकम किन स्रोतों से आई, दानदाता कौन थे और पार्टी ने इस धनराशि का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया। वीआईपी प्रवक्ता के मुताबिक, एजेपी एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और ऐसे दल के खाते में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा आना असामान्य है। उन्होंने मांग की कि पार्टी अपने दानदाताओं की सूची, चंदे के स्रोत, बैंक लेन-देन, खर्च का विवरण और राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक करे।
– पार्टी के गठन से लेकर नेतृत्व परिवर्तन तक सवाल
देव ज्योति ने एजेपी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना वर्ष 2020 में पटना में हुई थी और उस समय अनामिका पासवान इसके अध्यक्ष पद पर थीं। उनके अनुसार, बाद में अनामिका पासवान के भाजपा की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष बनने और गौरव मिश्रा के एजेपी की कमान संभालने के बाद पार्टी का मुख्य ठिकाना गुजरात का अहमदाबाद शहर स्थानांतरित हो गया। वीआईपी नेता ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन, पार्टी के ठिकाने में बदलाव और बड़े वित्तीय लेन-देन के बीच यदि कोई संबंध है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन की पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास का अहम हिस्सा है।
– भाजपा से भी मांगा स्पष्टीकरण
देव ज्योति ने इस पूरे प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी बिहार इकाई के नेताओं और एजेपी के बीच क्या राजनीतिक या संगठनात्मक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब एजेपी की पूर्व अध्यक्ष बाद में भाजपा की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष बनीं, तब एजेपी को मिली कथित भारी-भरकम फंडिंग को लेकर भाजपा का पक्ष सामने आना चाहिए। वीआईपी प्रवक्ता ने कहा कि 620 करोड़ रुपये की कथित फंडिंग को लेकर किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि धनराशि के स्रोत क्या थे और उसका इस्तेमाल नियमानुसार हुआ या नहीं। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। मामले की वास्तविकता का अंतिम निर्धारण संबंधित वित्तीय दस्तावेजों और सक्षम जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकेगा।

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