August 14, 2026

पाली निकाय चुनाव: आरक्षण ने बदली तस्वीर, पहली बार महिला महापौर का रास्ता साफ

पाली। राजस्थान के पाली जिले में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई है। गुरुवार को घोषित आरक्षण लॉटरी के बाद पाली नगर निगम, जिला परिषद और जिले की प्रमुख नगर पालिकाओं का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। जारी लॉटरी के अनुसार पाली नगर निगम में महापौर की सीट 'अनारक्षित महिला' वर्ग के लिए तय की गई है, जिसके चलते पाली को अपनी पहली निर्वाचित महिला महापौर मिलना तय हो गया है। वहीं पाली जिला प्रमुख की सीट 'अनुसूचित जाति' (SC) वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।

निकायों में आरक्षण का नया गणित

लॉटरी प्रक्रिया के तहत जिले की विभिन्न नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। बाली और तखतगढ़ नगर पालिका को 'अनारक्षित महिला' वर्ग के लिए रखा गया है, जबकि फालना-खुड़ाला नगर पालिका की सीट 'ओबीसी महिला' के खाते में गई है। सुमेरपुर और सोजत सिटी नगर पालिका 'अनारक्षित ओपन' रहेंगी, वहीं रानी खुर्द नगर पालिका 'ओबीसी' के लिए आरक्षित हुई है। इसके अलावा नवनिर्मित मारवाड़ जंक्शन और सोजत रोड नगर पालिका में अध्यक्ष पद 'अनुसूचित जाति' (SC) वर्ग के लिए तय किया गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में पाली नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड किया गया था, जिसके बाद तत्कालीन सभापति रेखा भाटी पाली की पहली कार्यवाहक महापौर बनी थीं। अब चुनाव के बाद शहर को अपनी पहली चुनी हुई महिला महापौर मिलेगी।

17 अगस्त को निकाली जाएगी वार्डवार लॉटरी

नगरीय निकायों के आगामी आम चुनावों के लिए वार्डों के वर्गवार और महिला आरक्षण की लॉटरी 17 अगस्त को सुबह 10 बजे जिला परिषद सभागार में निकाली जाएगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. बजरंग सिंह ने बताया कि पाली नगर निगम के 65 वार्डों के साथ-साथ जिले की सभी 9 नगर पालिकाओं के वार्डों का आरक्षण उसी दिन तय किया जाएगा।

प्रशासनिक इतिहास और मतदाताओं की स्थिति

पाली में नगरीय निकाय का इतिहास आजादी से भी पुराना है, जहां 1945 में पहली नगर पालिका गठित की गई थी। 1945 से लेकर 2024 तक के लंबे सफर में केवल तीन महिलाएं ही नगर परिषद की सभापति कुर्सी तक पहुंच सकी हैं। इसके अलावा पाली निकाय में 1978 से अब तक 23 बार प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। 26 नवंबर 2024 को पिछला बोर्ड भंग होने के बाद से जिला कलेक्टर ही प्रशासक का कार्यभार संभाल रहे हैं।

जिले के 10 निकायों के कुल 320 वार्डों में 3 लाख 57 हजार से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। सबसे अधिक 1.80 लाख मतदाता पाली नगर निगम (65 वार्ड) में हैं, जबकि सबसे कम 11 हजार मतदाता रानी खुर्द नगर पालिका में हैं। दूसरी ओर, जिले की पंचायत समितियों में 10 लाख 93 हजार से अधिक ग्रामीण मतदाता दर्ज हैं, जिनमें सर्वाधिक 1.91 लाख मतदाता बाली पंचायत समिति में हैं।