सपा के गढ़ में ओवैसी की एंट्री, 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा संकेत

लखनऊ| एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच के मटेरा में जनसभा कर विधानसभा चुनाव के लिए अपनी भावी रणनीति का संकेत दे दिया है। ओवैसी ने मुस्लिम समाज से बड़ी पार्टियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी राजनीतिक ताकत मजबूत करने की अपील की। ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की क्षमता रखती है। मटेरा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने चुनावी तैयारी का संदेश दे दिया है। यह सीट सपा का गढ़ मानी जाती है, इसलिए यहां से अभियान शुरू करना राजनीतिक लिहाज से अहम माना जा रहा है। यही नहीं, ओवैसी ने यूपी में 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान भी किया है।

रणनीतिक तौर पर किया बहराइच का चयन

ओवैसी की सभा ऐसे समय हुई जब बहराइच में महाराजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद गाजी की विरासत को लेकर बहस तेज है। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव की विरासत को प्रमुखता से उठा रहे हैं, जबकि एआईएमआईएम ने धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा है।

पूर्वांचल में राजनीतिक विस्तार करना चाहती है पार्टी

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर संजय गुप्ता कहते हैं कि एआईएमआईएम पूर्वांचल के मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रही है। बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, आजमगढ़ और आसपास के जिलों में पार्टी संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है। ओवैसी की रणनीति भाजपा और सपा दोनों के परंपरागत वोट आधार को चुनौती देने की मानी जा रही है।

2027 चुनाव पर संभावित प्रभाव

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भले ही एआईएमआईएम का संगठन अभी यूपी में कमजोर है, लेकिन ओवैसी की सभाएं मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक जागरूकता और स्वतंत्र प्रतिनिधित्व की बहस को मजबूत कर रही हैं। इससे विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और गठबंधन समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है। ओवैसी केवल चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि यूपी की राजनीतिक बहस को प्रभावित करने की रणनीति के साथ मैदान में हैं। सुहेलदेव-गाजी विवाद, पूर्वांचल में विस्तार की कोशिश और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वैचारिक-ऐतिहासिक बहस का केंद्र भी बनी ओवैसी की सभा

इस सभा से पहले और बाद में भाजपा व सहयोगी दलों ने ओवैसी के बयानों का विरोध किया है। सुभासपा के नेताओं ने महाराजा सुहेलदेव की विरासत को लेकर एआईएमआईएम की राजनीति पर सवाल उठाए। इस कारण बहराइच की सभा केवल राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर वैचारिक-ऐतिहासिक बहस का केंद्र भी बन गई।

कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने ओवैसी को नसीहत दी कि जब वे यूपी आएं तो अपने नेताओं को इतिहास और मर्यादित भाषा का ज्ञान भी दें। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एआईएमआईएम के एक नेता महाराजा सुहेलदेव के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि अगर सुहेलदेव राजा होते तो बहराइच में उनका कोई किला होता।

राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ओवैसी साहब, अब जब आप यूपी आ ही रहे हैं तो अपनी हैदराबादी बैरिस्टरी का थोड़ा-बहुत ज्ञान अपने सिपहसालार को भी दे दीजिएगा। उन्होंने कहा कि यही वो भूमि है जहां चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष किया था। महाराजा सुहेलदेव केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और राजभर समाज के गौरव के प्रतीक हैं।