August 25, 2026

ONOE पर विपक्ष का बड़ा प्लान, चिदंबरम बोले- पूरे देश में चलाएंगे अभियान

नई दिल्ली: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक देश, एक चुनाव) के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध अब संसद के कमरों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि 2029 में लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराना मुमकिन नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि यह कदम भारत के संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

2029 में एकीकृत चुनाव कराने की व्यावहारिकता पर सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर इस कानून के लागू होने को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष उन्होंने अपने विचार रखे हैं।

चिदंबरम का कहना है कि विधेयक के प्रावधानों के तहत 'नियुक्त तिथि' (Appointed Date) का निर्धारण आम चुनावों के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में यदि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, तो उसी वर्ष सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की योजना कानूनी और तकनीकी धरातल पर खरी नहीं उतरती।

संघीय ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था पर प्रभाव

विपक्ष का मुख्य तर्क है कि भारत की बहुदलीय और संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के चुनाव अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों में होते हैं:

  • राज्यों की स्वायत्तता: सभी राज्यों के चुनावों को एक ही समयसीमा में बांधने से राज्यों की राजनीतिक स्वतंत्रता और अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

  • समय से पहले विघटन: यदि कोई राज्य सरकार या केंद्र सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले गिर जाती है, तो एक समान चुनाव चक्र को बनाए रखना बेहद जटिल होगा।

संसद से सड़कों तक देशव्यापी विरोध की तैयारी

संसदीय समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने के साथ ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को अब जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। विपक्ष का मानना है कि यह विषय केवल चुनावी प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक स्वरूप और संविधान के मूल सिद्धांतों से जुड़ा है।