August 25, 2026

नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी, CBI कार्ड और फर्जी IAS बनकर घूम रहे भाई-बहन पकड़े गए

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर क्षेत्र में नकली प्रशासनिक अधिकारी बनकर लोगों को चपत लगाने वाले भाई-बहन की साजिशों का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस छानबीन को आगे बढ़ा रही है। साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से पुलिस की विशेष टीम दोनों आरोपियों को लेकर भोपाल रवाना हो चुकी है। फर्जी पहचान पत्र, सीबीआई का नकली कार्ड और महंगे मोबाइल के साथ दबोचे गए इस गिरोह से अब तक करीब 10 लाख रुपये की जालसाजी का हिसाब मिला है। हालांकि, कड़ाई से पूछताछ जारी रहने पर ठगी का यह आंकड़ा काफी बड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।

बड़ी पहचान का झूठा ढांचा

पकड़े गए आरोपियों में तृप्ति सिंह राजपूत और उसका भाई सुधांशु राजपूत शामिल हैं। तृप्ति खुद को पर्यटन विभाग में अपर निदेशक और मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च पद पर कार्यरत बताकर जाल बिछाती थी, जबकि उसका भाई खुद को मीडियाकर्मी के रूप में प्रस्तुत करता था। सरकारी विभाग में भर्ती कराने का सपना दिखाकर तृप्ति मासूम लोगों से मोटी रकम वसूलती थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि महिला ने स्वयं को आईएएस अफसर बताकर एक कारोबारी से विवाह रचाया था, लेकिन झूठ उजागर होने के बाद दोनों का अलगाव हो गया।

महल में ठहरकर रचा गया षड्यंत्र

घटनाक्रम के अनुसार, दोनों आरोपी अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ बीते अप्रैल माह में चंदेरी भ्रमण पर पहुंचे थे। अपना रुतबा चमकाने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक किला कोठी में डेरा डाला, ताकि स्थानीय लोगों पर असर जमाकर उन्हें आसानी से ठगा जा सके। इसी दौरान तीन लोगों को निशाने पर लेते हुए आरोपी महिला ने सरकारी महकमे में पक्की नौकरी लगवाने का वादा किया। इस काम के एवज में प्रति व्यक्ति तीन लाख रुपये की मांग तय की गई।

नकद राशि ऐंठने का खुलासा

भरोसे में आकर पीड़ितों ने आरोपियों को किला कोठी में ही 9 लाख 80 हजार रुपये नगद सौंप दिए, जबकि 2 लाख रुपये बाद में देना तय हुआ। चालबाज़ी का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब आरोपी शनिवार को फर्जी जॉइनिंग लेटर लेकर पहुंचे। कागज देखते ही पीड़ितों को संदेह हुआ और बहस शुरू हो गई। बात बिगड़ने पर पीड़ितों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने दोनों को हिरासत में ले लिया।

भोपाल में साक्ष्यों की तलाश

प्रारंभिक जांच में आरोपियों के नेटवर्क के तार प्रदेश की राजधानी से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। इसी वजह से पुलिस दोनों को अशोकनगर से भोपाल ले जाकर ठगी के पूरे तंत्र की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिससे फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का सच सामने आ सके।