नई दिल्ली: भारत आज 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ मना रहा है, जो पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारतीय सेना द्वारा की गई एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर सेना के अदम्य साहस और सटीकता की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। यह ऑपरेशन न केवल सैन्य कौशल का प्रतीक बना, बल्कि इसने आधुनिक युद्ध कला में विभिन्न रक्षा सेवाओं के बीच बेहतरीन तालमेल का एक नया मानक भी स्थापित किया।
राष्ट्रीय संकल्प और सैन्य पराक्रम का प्रदर्शन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से सेना के बलिदान को नमन करते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को राष्ट्रीय तत्परता का एक सशक्त उदाहरण बताया। उनके अनुसार, यह अभियान भारत की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता और किसी भी चुनौती का निर्णायक उत्तर देने की क्षमता को दर्शाता है। भारतीय वायुसेना और थल सेना द्वारा साझा किए गए वीडियो संदेशों ने इस बात पर जोर दिया कि देश अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या को न तो भूलता है और न ही दोषियों को माफ करता है, जो पाकिस्तान के लिए एक कड़ा और सीधा संदेश है।
पहलगाम हमले का प्रतिशोध और सीमा पर संघर्ष
इस पूरे घटनाक्रम की नींव पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पड़ी थी, जब पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में 26 बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को सीमा पार आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ा था। जवाबी कार्रवाई के रूप में जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो भारत ने मिसाइलों और ड्रोनों के जरिए शत्रु के अहम सैन्य बुनियादी ढांचे पर भीषण प्रहार कर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
तनाव का अंत और रणनीतिक जीत
भारत और पाकिस्तान के बीच यह सैन्य तनाव चार दिनों तक चरम पर रहा, जिसमें दोनों ओर से आधुनिक हथियारों का जमकर इस्तेमाल किया गया। चार दिनों के भीषण हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद, 10 मई को स्थिति तब बदली जब पाकिस्तान की ओर से किए गए अनुरोध के बाद युद्धविराम (सीजफायर) लागू हुआ। 'ऑपरेशन सिंदूर' की यह सफलता आज भी भारतीय रक्षा रणनीति में एक मील का पत्थर मानी जाती है, जिसने भविष्य के लिए स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सीमा पार जाकर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

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