मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाइयों की तरफ बढ़ते नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स 303.73 अंकों की छलांग लगाकर 74,222.49 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 85.40 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,327.50 के अंक पर कारोबार करता दिखा। बाजार को रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज और मजबूत ब्लू-चिप शेयरों में हुई चौतरफा लिवाली से बड़ा सहारा मिला। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाई। इससे पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार को भी शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था, जहां सेंसेक्स 394.50 अंक मजबूत होकर 73,918.76 पर और निफ्टी 119.10 अंक चढ़कर 23,242.10 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा था।
दिग्गज कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव का दौर
शेयर बाजार में आए इस उछाल के बीच कंपनियों के नफे-नुकसान की बात करें, तो सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में से अधिकांश मुनाफे के साथ कारोबार कर रही थीं। इनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे ये आज के टॉप गेनर्स (मुनाफा कमाने वाले) की सूची में शामिल रहे। इसके विपरीत, कुछ प्रमुख कंपनियों को बाजार की इस तेजी के बावजूद बिकवाली का सामना करना पड़ा, जिनमें मुख्य रूप से टाटा स्टील, इटरनल लिमिटेड, अदानी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि बड़े शेयरों में आई इस चयनात्मक खरीदारी से सूचकांक को ऊपर बनाए रखने में काफी मदद मिल रही है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से मंगलवार को 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की गई थी।
कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय बाजार को बड़ी राहत
वैश्विक कमोडिटी बाजार में अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बुधवार को मामूली गिरावट के साथ 91.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेंड कर रहा है, जो कि इसके पिछले 93 डॉलर के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। बाजार विश्लेषकों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी मार्केट फिलहाल पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रहा है और कच्चे तेल के दामों में आई यह कमी इसी बात का संकेत है। शोध विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों का घटना भारत जैसे बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद शुभ संकेत है। इससे देश के चालू खाता घाटे (कैड) पर होने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा और साथ ही घरेलू बाजार में महंगाई की चिंताओं को दूर करने में भी बड़ी मदद मिलेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
वैश्विक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
एक तरफ जहां शेयर बाजार में रौनक रही, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार से भारतीय करेंसी के लिए अच्छी खबर नहीं आई। बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे की कमजोरी के साथ 95.56 के स्तर पर फिसल गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.52 पर खुला था, लेकिन विदेशी बाजारों के दबाव के कारण यह टूटकर 95.56 तक चला गया, जबकि मंगलवार को रुपया 25 पैसे सुधरकर 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। कारोबारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच जारी जवाबी हमलों तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इस वजह से दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.03 प्रतिशत बढ़कर 99.94 पर पहुंच गया है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर भारतीय रुपये की सेहत पर पड़ रहा है।

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