September 28, 2026

PF को लेकर बड़ा बदलाव, ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेतन सीमा

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा पीएफ, पेंशन और बीमा के लिए अनिवार्य वैधानिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने के बाद से कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए इस पूरे बदलाव और इसके प्रभावों को आसान भाषा में समझते हैं।

क्या वेतन सीमा बढ़ने से हर कर्मचारी का पीएफ बढ़ेगा?

सबसे बड़ा भ्रम यह फैला है कि 25,000 रुपये तक कमाने वाले हर व्यक्ति के वेतन से अब 12% यानी 3,000 रुपये कटने लगेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है:

  • पीएफ की गणना का आधार: पीएफ की गणना हमेशा सामाजिक सुरक्षा नियमों के तहत तय वेतन पर होती है, जिसमें मुख्य रूप से मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होते हैं।

  • 15,000 रुपये तक सैलरी वालों पर असर: यदि किसी कर्मचारी का वास्तविक मूल वेतन और डीए मिलाकर 15,000 रुपये ही है, तो उसका अंशदान पहले की तरह 1,800 रुपये ही कटता रहेगा, भले ही उसकी कुल ग्रॉस सैलरी अधिक हो।

  • वास्तविक बदलाव: यह नया बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों पर लागू होगा जिनका वास्तविक मूल वेतन और डीए 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये के बीच है। उदाहरण के लिए, यदि किसी का मूल वेतन+डीए 20,000 रुपये है, तो अब उसका 12% यानी 2,400 रुपये पीएफ कटेगा (जो पहले के 1,800 रुपये से अधिक है)।

नई वेतन सीमा का वास्तविक उद्देश्य

25,000 रुपये की इस नई सीमा का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि किस दायरे तक के कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पीएफ के दायरे में लाया जाना चाहिए।

  • इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 30,000 रुपये या उससे अधिक कमाने वाले किसी भी कर्मचारी का पूरा पीएफ 25,000 रुपये पर काटा जाएगा।

  • 25,000 रुपये से अधिक कमाने वाले मामलों में पुराने नियमों और कर्मचारियों की मौजूदा श्रेणी को देखा जाएगा। साथ ही, जो पुराने सदस्य हैं और जिनकी सैलरी बढ़ चुकी है, उनकी सदस्यता समाप्त नहीं होगी।

कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए क्या है चुनौती?

यह बदलाव केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए भी एक अतिरिक्त वैधानिक लागत लेकर आया है:

  1. पे-रोल प्रणाली अपडेट करना: कंपनियों को तुरंत अपनी पे-रोल सॉफ्टवेयर और प्रणाली को नए नियमों के मुताबिक अपडेट करना होगा।

  2. टेक-होम सैलरी पर असर: नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बढ़ी हुई पीएफ देनदारी (एम्प्लॉयर शेयर) का पूरा वित्तीय बोझ कर्मचारियों की 'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाली तनख्वाह) को अवैध रूप से घटाकर उन पर न थोपें।