ईंधन विकल्पों को लेकर केजरीवाल की मांग, बोले- उपभोक्ताओं को मिले E20, E10 और E0 का विकल्प

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जनता की इच्छा के विरुद्ध जबरन E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) ईंधन थोपने का गंभीर आरोप लगाया है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने मांग की कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार ईंधन चुनने की आजादी होनी चाहिए और वहां E20, E10 और E0 (शुद्ध पेट्रोल) जैसे सभी विकल्प अलग-अलग कीमतों के साथ उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

केजरीवाल का आरोप: जनता के विरोध के बावजूद अड़ी है सरकार

'आप' प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश भर में E20 ईंधन को लेकर भारी जन-आक्रोश और विरोध देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार अड़ियल रुख अपनाए हुए है। उन्होंने कहा, "मैं इस जिद के पीछे की असली वजह नहीं जानता, लेकिन सरकार झुकने को तैयार नहीं है। जनता को गुमराह करने के लिए आए दिन नए-नए भ्रामक दावे किए जा रहे हैं। सरकार के एक मंत्री कुछ बोलते हैं, तो दूसरे मंत्री का बयान कुछ और ही होता है।"

वाहन निर्माता कंपनियों पर दबाव बनाने का दावा

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर पर्दे के पीछे से ऑटोमोबाइल कंपनियों पर दबाव बनाने का बड़ा आरोप मढ़ा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 3 जुलाई को देश की छह दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों को तलब किया था। सरकार ने इन कंपनियों से कहा कि वे मीडिया के सामने जाएं और जनता को यह भरोसा दिलाएं कि E20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है। केजरीवाल के अनुसार, इन छह कंपनियों में शामिल हैं:

  • मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki)

  • टोयोटा किर्लोस्कर (Toyota Kirloskar)

  • हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp)

  • हुंडई मोटर (Hyundai Motor)

  • बजाज ऑटो (Bajaj Auto)

  • टीवीएस मोटर कंपनी (TVS Motor Company)

केजरीवाल ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनियों को केवल मौखिक आश्वासन देने के बजाय लिखित में गारंटी देनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे 'आप' संयोजक

इस पूरे संकट को लेकर केजरीवाल ने एलान किया है कि वे अगले सप्ताह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखेंगे। प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने पूछा, "प्रधानमंत्री जी, आपके इस गलत फैसले (misadventure) का खामियाजा देश की आम जनता अपने पैसों से क्यों भुगते? अगर इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम होता है या उनके इंजन और पार्ट्स खराब होते हैं, तो इसकी भरपाई कौन करेगा—आपकी सरकार या फिर ये ऑटोमोबाइल कंपनियां?"

उन्होंने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री से अपील की कि वे देश के करोड़ों वाहन मालिकों की इस व्यावहारिक समस्या को समझें। लोकतंत्र में थोपने की बजाय विकल्प देना सबसे सही रास्ता है, इसलिए हर फ्यूल स्टेशन पर अलग-अलग दामों के साथ E20, E10 और बिना ब्लेंडिंग वाले E0 ईंधन के नोजल लगाए जाएं, ताकि लोग अपने वाहन की क्षमता के अनुसार खुद चुनाव कर सकें।