अंबाला। जिला मुख्यालय पर आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक में उस समय जबरदस्त हंगामा हो गया, जब राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर पूरी तरह बिफर पड़े। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत जनहित में अनुशंसित विकास कार्यों को प्रशासन द्वारा बार-बार नामंजूर किए जाने से क्षुब्ध होकर कार्तिकेय शर्मा ने तीखा विरोध दर्ज कराया और बैठक का बीच में ही बहिष्कार कर बाहर निकल गए।
प्रशासनिक अनदेखी से नाराज राज्यसभा सांसद ने बीच में छोड़ी बैठक
समीक्षा बैठक के दौरान जैसे ही लंबित विकास कार्यों का मुद्दा उठा, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता से जुड़े विकास कार्यों की फाइलों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है और बेवजह तकनीकी अड़चनें पैदा की जा रही हैं। तल्ख तेवरों में अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए सांसद ने कहा कि यदि उनके द्वारा भेजे गए जनहित के प्रस्तावों को इसी तरह खारिज ही किया जाना है, तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अपनी बात रखने के तुरंत बाद वे कड़ा विरोध जताते हुए सदन से उठकर चले गए।
अंबाला लोकसभा सांसद ने भी दर्ज कराया विरोध, मिला खुला समर्थन
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बीच राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा की नाराजगी को अंबाला के लोकसभा सांसद वरुण चौधरी का भी पुरजोर साथ मिला। वरुण चौधरी ने भी जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों को बेवजह अटकाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभावनाओं के खिलाफ है। लोकसभा सांसद ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि केवल राज्यसभा सांसद ही नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कई कल्याणकारी योजनाओं की फाइलें भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के टकराव से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
दोनों वरिष्ठ सांसदों के इस सख्त और आक्रामक रुख के चलते बैठक कक्ष में सन्नाटा पसर गया और वहां मौजूद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। सांसदों द्वारा सामूहिक रूप से नाराजगी जताए जाने और बैठक का वॉकआउट करने से जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। विकास योजनाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच खुलकर सामने आया यह गतिरोध अब क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस और चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।

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