ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के हालिया आदेश के बाद 30 जुलाई 2009 के शासनादेश के क्रियान्वयन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। याचिकाकर्ता सुरेश सिंह सिकारवार ने प्रमुख सचिव, लोक शिक्षण आयुक्त तथा मुरैना एवं श्योपुर के जिला कलेक्टर्स सहित वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत अभ्यावेदन सौंपा है। इस अभ्यावेदन के माध्यम से वर्षों पुराने शासकीय आदेश का तत्काल पालन कराने और संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का जोरदार आग्रह किया गया है।
स्क्रीनिंग समिति की रिपोर्ट और अपात्र कर्मचारियों को वित्तीय लाभ का आरोप
मामले की पृष्ठभूमि में दावा किया गया है कि वर्ष 1995 में निजी शिक्षण संस्थाओं के शासकीयकरण के समय गठित दूसरी स्क्रीनिंग समिति ने 131 कर्मचारियों में से केवल 28 को पात्र माना था, जबकि 103 कर्मचारियों को अपात्र घोषित किया था। इसी आधार पर वर्ष 2009 में शासन ने अपात्र कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया था, जिसे बाद में समीक्षा याचिका में हाई कोर्ट ने भी वैध ठहराया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आदेश के बावजूद अपात्र कर्मचारी अब तक सेवा में बने हुए हैं और निरंतर वेतन, पदोन्नति एवं अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिससे राज्य के खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
हाई कोर्ट ने दिए तीन माह के भीतर न्यायसंगत निर्णय के सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देते हुए तीन महीने के भीतर एक कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। अदालत ने साफ किया है कि उसने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। इस न्यायिक निर्देश के बाद अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के लिए तय सीमा के भीतर पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कर न्यायसंगत फैसला लेना अनिवार्य हो गया है।
अधिकारियों पर नियम विरुद्ध वित्तीय अधिकार सौंपने का लगा गंभीर आरोप
अभ्यावेदन में जिला शिक्षा अधिकारी, मुरैना की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से राजेंद्र सिंह सिकारवार को मुरैना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी तथा रामअवतार सिंह को पहाड़गढ़ ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर उन्हें आहरण एवं संवितरण के वित्तीय अधिकार सौंप दिए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि विभागीय शर्तों का उल्लंघन कर नियम विरुद्ध वित्तीय शक्तियां प्रदान की गई हैं, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए।

More Stories
मध्य प्रदेश विधानसभा में NEET मुद्दे पर प्रदर्शन, कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
दबंगों की मनमानी से 500 परिवार परेशान, रीवा में सड़क विवाद ने पकड़ा तूल
PM किसान योजना के नाम पर जमीन हड़पने का आरोप, बुजुर्ग ने सरपंच पर लगाए गंभीर आरोप