September 10, 2026

ग्वालियर में सवर्ण समाज का बड़ा आंदोलन, UGC नियमों के रोलबैक और सवर्ण आयोग की मांग

ग्वालियर। यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों के विरोध, जातिगत नीतियों की समीक्षा, एससी-एसटी अधिनियम में संशोधन तथा सवर्ण आयोग के गठन जैसी मांगों को लेकर गुरुवार को ग्वालियर में संभागीय स्तर का प्रदर्शन आयोजित किया गया। सर्व संगठन और परशुराम सेवा संगठन के आह्वान पर सवर्ण समाज के प्रतिनिधि फूलबाग मैदान में एकत्र हुए। हालांकि आयोजकों ने भारी जनसैलाब का दावा किया था, लेकिन मैदान में उपस्थिति अनुमान से काफी कम रही।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासन अलर्ट

वर्ष 2018 के आंदोलनों के दौरान हुए घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर पुलिस व जिला प्रशासन पूर्ण रूप से सतर्क नजर आया। एएसपी सुजावल जग्गा के अनुसार, व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी गई तथा शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात को सुगम बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया।

यूजीसी नियमों और आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग

आंदोलनकारियों ने शिक्षा क्षेत्र में लागू किए जा रहे नए दिशा-निर्देशों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की। उनका तर्क है कि मौजूदा नीतियों से सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए नीतियों में संशोधन पर बल दिया गया।

एससी-एसटी एक्ट में जांच प्रावधान की मांग

प्रदर्शन के दौरान राजपूत करणी सेना के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजा चौहान ने एससी-एसटी अधिनियम में बदलाव की बात रखी। उन्होंने मांग की कि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय प्राथमिक जांच का प्रावधान जोड़ा जाए और झूठे मामले दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएं।

सवर्ण आयोग का गठन और आर्थिक आधार पर आरक्षण

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सवर्ण आयोग की स्थापना शामिल रही। वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण का मुख्य आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति होना चाहिए, ताकि सभी वर्गों के निर्धन व्यक्तियों को इसका लाभ मिल सके।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और चेतावनी