लाहौर,। हाल ही में पाकिस्तान और इजरायल के अधिकारियों के बीच सार्वजनिक और गुप्त रूप से मुलाकातें हुई हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य होने का संकेत दे रही हैं। शहबाज शरीफ के पर्यटन सलाहकार सरदार यासिर इलियास खान ने लंदन में वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट मेला में इजराइली पर्यटन महानिदेशक माइकल इजाकोव से मुलाकात की। इससे पहले मिस्र में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने कथित तौर पर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और सीआईए के अधिकारियों से मुलाकात की थी। यह माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पाकिस्तान पर इजरायल को मान्यता देने के लिए दबाव बढ़ा रहा है, और पाकिस्तान अब्राहम समझौते 2.0 में शामिल हो सकता है। पाकिस्तान गाजा में पुननिर्माण के लिए ट्रंप की शांति योजना का समर्थन कर सकता है, जिसमें हमास को खत्म करना शामिल है। पाकिस्तान ने गाजा में अपनी सेना भेजने पर विचार करने की बात कही है। अमेरिका की दक्षिण-मध्य एशिया योजना में पाकिस्तान को एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना में ईरान को घेरने के लिए बलूचिस्तान में बंदरगाह और खदानों में संभावित अमेरिकी सैनिकों की तैनाती शामिल है। पाकिस्तान ने अमेरिका को ग्वादर के पास पसनी बंदरगाह भी ऑफर किया है, जिसका इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। अमेरिका ने बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जिससे बलूचिस्तान में अमेरिकी खनन कंपनियों की उपस्थिति आसान हो सके, जहां कथित तौर पर दुर्लभ मृदा भंडार हैं। आलोचकों को डर है कि बलूचिस्तान एक नया युद्ध का मैदान बन सकता है। यह खबर बताती है कि पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने और अमेरिका की मध्य-पूर्व व दक्षिण-एशियाई रणनीतियों में एक प्रमुख भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका सीधा संबंध गाजा में हमास को खत्म करने और ईरान को काउंटर करने की योजनाओं से है।

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