एनकाउंटर में मारा गया इंद्रपाल, इंस्पेक्टर को पहले ही दे चुका था धमकी

झज्जर। "दो हत्याएं कर चुका हूं, दो-चार और कर दूंगा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए पीछे हट जाओ।" मुठभेड से ठीक पहले यह खौफनाक धमकी शातिर अपराधी इंद्रपाल ने पुलिस टीम को दी थी। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के प्रभारी ने उसे हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने की आखिरी चेतावनी दी, लेकिन आरोपी ने उसे अनसुना करते हुए पुलिस दल पर सीधे गोली चला दी। यह गोली वहां तैनात पीएसआई सचिन की बुलेट प्रूफ जैकेट पर जाकर लगी, जिससे वे बाल-बाल बच गए।

इसके जवाब में एसटीएफ इंचार्ज ने आत्मरक्षा में तीन गोलियां चलाईं, जो आरोपी इंद्रपाल को लगीं और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया। जब पुलिस टीम ने आगे बढ़कर उसे पकड़ने की कोशिश की, तो उसने घायल अवस्था में भी दुस्साहस दिखाते हुए इंस्पेक्टर राकेश पर निशाना साधकर फायर कर दिया। इस हमले में गोली इंस्पेक्टर की बाजू को चीरती हुई निकल गई, जिससे वे जख्मी हो गए।

एक और बड़ी हत्या की साजिश में था शामिल

एसटीएफ बहादुरगढ़ के पीएसआई दीपक द्वारा स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, रोहतक के कसरैटी गांव का रहने वाला यह कुख्यात अपराधी इंद्रपाल, विजय सैनी नामक व्यक्ति के बेटे सुनील सैनी की हत्या करने की ताक में था। इसी खूनी साजिश को अंजाम देने के लिए वह रविवार को दुजाना क्षेत्र में दाखिल हुआ था, लेकिन मुखबिर की सूचना पर मुस्तैद पुलिस टीम से उसका सामना हो गया और वह एनकाउंटर में ढेर हो गया।

मजिस्ट्रेट की देखरेख में हुआ पोस्टमार्टम

प्रशासनिक नियमों के तहत सोमवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं बेरी की एसडीएम रेणुका नांदल की प्रत्यक्ष निगरानी में डॉक्टरों के एक विशेष बोर्ड द्वारा शव का परीक्षण किया गया। इस पूरी प्रक्रिया की बकायदा वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम से ठीक पहले मृतक का एक्स-रे कराया गया, जिसमें उसे तीन गोलियां लगने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार, दो गोलियां शरीर के आर-पार निकल गईं जबकि एक गोली अंदर ही फंसी मिली। दुजाना थाना पुलिस ने मृतक के चाचा के आधिकारिक बयानों के आधार पर कागजी कार्रवाई पूरी कर शव को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया, जिसके बाद देर शाम गांव में उसका दाह-संस्कार कर दिया गया।

परिजनों ने कहा- जैसा बोया, वैसा काटा

इस घटना के बाद नागरिक अस्पताल पहुंचे मृतक के परिजनों और चुनिंदा रिश्तेदारों के चेहरे पर गम से ज्यादा पछतावा साफ देखा जा सकता था। मृतक अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गया है। अस्पताल परिसर में पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान परिजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंद्रपाल ने जैसा कर्म दूसरों के साथ किया था, आज उसके साथ भी वैसा ही न्याय हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिन बेकसूरों को उसने मौत के घाट उतारा था, आखिर उनके भी तो बच्चे थे। दुजाना थाने के जांच अधिकारी युद्धवीर सिंह ने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर मामला दर्ज कर लिया गया है।