September 12, 2026

कर्मचारी की मौत पर मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; मृतक कर्मचारियों के मुआवजे के लिए अब 'एक्चुअल सैलरी' बनेगी आधार, काल्पनिक वेतन सीमा खत्म

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के पक्ष में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे (सहायता राशि) की गणना किसी पुरानी या काल्पनिक वेतन सीमा (Salary Ceiling) पर नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, मुआवजे का आधार वही 'वास्तविक वेतन' (Actual Salary) होना चाहिए, जो कर्मचारी को उसकी मृत्यु के समय प्राप्त हो रहा था।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जगदलपुर के एक ट्रक ड्राइवर सत्येंद्र सिंह से जुड़ा है, जिनकी 15 दिसंबर 2017 को एक सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके परिजनों (पत्नी, बच्चों और मां) ने मुआवजे के लिए दावा पेश किया था।

बीमा कंपनी की दलील और कोर्ट का रुख

  • लेबर कोर्ट का आदेश: निचली अदालत (लेबर कोर्ट) ने ड्राइवर की मासिक आय 9,880 रुपये मानते हुए परिजनों को करीब 9.49 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था।

  • बीमा कंपनी की चुनौती: बीमा कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी का तर्क था कि केंद्र सरकार के नियमों के तहत मुआवजे की गणना के लिए अधिकतम वेतन सीमा 8,000 रुपये ही मानी जानी चाहिए।

  • हाई कोर्ट का फैसला: जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि मुआवजे का उद्देश्य परिवार को वास्तविक आर्थिक सहारा देना है, इसलिए गणना 'एक्चुअल सैलरी' पर ही होनी चाहिए।

हजारों परिवारों को मिलेगी राहत

हाई कोर्ट के इस फैसले से नियमों की पेचीदगियों के कारण कम मुआवजा पाने वाले हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब नियोक्ताओं और बीमा कंपनियों को कर्मचारी के वास्तविक वेतन के आधार पर ही दावों का निपटारा करना होगा।