September 7, 2026

हॉस्टल सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, DU-MCD को एक हफ्ते में ऑडिट के निर्देश

नई दिल्ली। सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के दर्दनाक हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस घटना पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि इस त्रासदी के लिए केवल भवन मालिक ही दोषी नहीं है, बल्कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) भी समान रूप से जवाबदेह हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने संबंधित विभागों की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई।

डीयू और एमसीडी पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

पीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय दूसरे राज्यों से उच्च शिक्षा के लिए आने वाले छात्रों को पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इसी लाचारी और मजबूरी का फायदा उठाकर छात्र असुरक्षित और अवैध पेइंग गेस्ट (पीजी) में रहने को विवश होते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी तंत्र और शैक्षणिक संस्थान अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

लापरवाह अधिकारियों पर भी तय होगी जिम्मेदारी, एक हफ्ते में सेफ्टी ऑडिट

अदालत ने कहा कि असुरक्षित और अवैध निर्माणों के लिए सिर्फ मकान मालिकों को जिम्मेदार ठहराकर सरकारी एजेंसियां नहीं बच सकतीं। यदि संबंधित अधिकारियों ने अपने वैधानिक कर्तव्यों का पालन किया होता, तो इस हादसे को रोका जा सकता था। पीठ ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर राजधानी के सभी पीजी और हॉस्टलों का व्यापक 'सेफ्टी ऑडिट' पूरा करे। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि यह बेहद गंभीर है कि दो मंजिल के स्वीकृत नक्शे पर पुरानी नींव के सहारे छह मंजिला इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं और अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं।

10 दिनों में मांगा विस्तृत हलफनामा, 25 सितंबर को अगली सुनवाई

एक जनहित याचिका पर त्वरित संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सभी संबंधित प्राधिकरणों को 10 दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वर्तमान में पीजी के संचालन और उनकी सुरक्षा जांच को लेकर क्या नियामक दिशानिर्देश (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) लागू हैं।

डीयू से हॉस्टल व्यवस्था और छात्रों का ब्योरा तलब

हाईकोर्ट ने डीयू प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें बाहरी राज्यों से आने वाले कुल छात्रों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध वैध हॉस्टल सीटों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके अलावा, अदालत ने हादसे वाली इमारत की वैध निर्माण अनुमति, नक्शे के उल्लंघन और संबंधित निगरानी अधिकारियों द्वारा बरती गई घोर लापरवाही की तथ्यात्मक रिपोर्ट भी तलब की है।

सॉलिसिटर जनरल ने दिया त्वरित बचाव कार्य का भरोसा

केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और एमसीडी का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान पूरी ताकत के साथ चलाया जा रहा है। सरकार जमीनी स्तर पर स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है और जनसुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने राहत एवं बचाव कार्यों में कोई भी कसर न छोड़ने के निर्देश दोहराए हैं।