September 7, 2026

सत्ता के दुरुपयोग को लेकर विजय का हमला, बोले- दोषी चाहे कोई हो, होगी कार्रवाई

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को राज्य की पूर्ववर्ती डीएमके (DMK) सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। विधानसभा में बहस के दौरान उन्होंने सरकारिया आयोग की रिपोर्ट, वीरनम पाइपलाइन प्रोजेक्ट और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दावों का हवाला देते हुए पूर्व सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की चेतावनी दी।

महिलाओं पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, विपक्ष के रवैये पर सवाल

पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन महिलाओं के विरुद्ध अश्लील या अपमानजनक टिप्पणियां किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव में डीएमके को वोट न देने वाली जनता के खिलाफ विपक्षी नेताओं द्वारा दिए गए बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि यह जनादेश का अनादर है, जिसके चलते जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठाया है।

भ्रष्टाचार के पुराने मामलों और ईडी की कार्रवाई का दिया हवाला

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मुद्दों पर आधिकारिक रिकॉर्ड और विधानसभा लाइब्रेरी में मौजूद दस्तावेजों का जिक्र किया:

  • सरकारिया आयोग और वीरनम प्रोजेक्ट: 1977 की सरकारिया आयोग रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वीरनम पाइपलाइन परियोजना में ठेके देने के बदले कमीशन मांगा गया था और सीएम कार्यालय का दुरुपयोग एक विशिष्ट कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।

  • ईडी के आरोप और नेताओं के नाम: विजय ने ईडी के आरोपों का हवाला देते हुए दावा किया कि पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी ने अपने पद का दुरुपयोग कर लेन-देन में 7.5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया। इस दौरान उन्होंने पार्टी फंड और लेन-देन के सिलसिले में एम.के. स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन के नामों का भी उल्लेख किया।

'सार्वजनिक हैं रिकॉर्ड, सत्ता के लिए राजनीति में नहीं आया'

डीएमके को सबूत मांगने के बजाय आरोपों का जवाब देने की चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सारे सबूत और दस्तावेज पहले से ही सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति में किसी पद या सत्ता के लालच में नहीं, बल्कि जनसेवा के उद्देश्य से आए हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सी.एन. अन्नादुरई, एम.जी. रामचंद्रन और एन.टी. रामाराव की राजनीतिक विरासत का स्मरण करते हुए विश्वास जताया कि जनसेवा और जनता का स्नेह ही अंततः राजनीति में सबसे ऊपर रहेगा।