DY Chandrachud On Umar Khalid: दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका नामंजूर कर दी थी. उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के करीब दो हफ्ते बाद पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय की प्रक्रिया को कमजोर करती है.
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने क्या कहा?
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ रविवार (18 जनवरी) को जयपुर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलना नागरिक का एक अधिकार है. यदि कोई मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है तो गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए.
‘उन्हें सुनवाई का अधिकार है’
पूर्व सीजेआई ने कहा कि उमर खालिद पांच साल से जेल में हैं. मैं न्यायालय की आलोचना नहीं कर रहा हूं. जमानत की शर्तों का दुरुपयोग किया जाता है तो आप शर्तें लगा सकते हैं. इसके साथ ही आपको ध्यान रखना होगा कि उन्हें सुनवाई का अधिकार है. वर्तमान में परिस्थितियों में जल्द सुनवाई संभव नहीं है तो जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम की तरह होना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि मैंने अपने 24 महीने के कार्यकाल में 21 हजार याचिकाओं का निपटारा किया. कई ऐसे मामले हैं, जिनके बारे में सुप्रीम कोर्ट के किसी मामले में जमानत ने देने पर आलोचना करते समय नहीं सोचते हैं.
जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
2020 में हुए दिल्ली दंगे की साजिश रचने में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को मुख्य योजनाकार माना है.
खालिद-शरजील समेत अन्य आरोपियों पर UAPA की धारा 15 के तहत मामला दर्ज किया गया था.
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपियों गुलशिफा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी.
कोर्ट ने मुख्य सूत्रधारों और सहयोगियों के बीच अंतर बताया था.

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