वाराणसी। थाना सारनाथ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फरीदपुर अंडरपास के समीप से चोरी की विभिन्न वारदातों को अंजाम देने वाले बांग्लादेश के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद बैरूल इस्लाम और मोहम्मद शफीकुल इस्लाम उर्फ मुन्ना के रूप में की गई है। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी किए गए बहुमूल्य आभूषण, नकदी, ताला तोड़ने के उपकरण और बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद किए हैं। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद एटीएस सहित तमाम खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।
दिन में रेकी और रात को ताला तोड़कर चोरी को अंजाम देने का तरीका
पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के चपाय नवाबगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं और पूर्व में भी अवैध रूप से भारत आ चुके हैं। वर्तमान में वे लगभग तीन महीने पहले वाराणसी आए थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दिन के समय शहर में लक्षित मकानों की रेकी करते थे तथा रात के वक्त तालों को तोड़कर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। उन्होंने बीते 19 अक्टूबर को अमनपुरी कॉलोनी स्थित एक मकान का ताला तोड़कर बड़ी चोरी की थी, जिसके कुछ जेवरात वे पहले ही बेच चुके हैं। तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके पास से चांदी के पायल, चेन, चार हजार रुपये नकद, दो लोहे की सब्बल, पेचकस, मोबाइल फोन और पासपोर्ट बरामद किए हैं। न्यायालय में पेश करने के उपरांत दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
कोलकाता के रास्ते वाराणसी आगमन और सामान चोरी होने के बाद अपराध का मार्ग
गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे गत 25 सितंबर को बांग्लादेश से कोलकाता पहुँचे थे और वहाँ से ट्रेन के जरिए वाराणसी आए थे। यहाँ आने के बाद मोहम्मद शफीकुल इस्लाम उर्फ मुन्ना का सारा सामान चोरी हो गया, जिसके कारण वे आर्थिक तंगी और बेसहारा स्थिति में आ गए। इसके बाद वे सारनाथ के फरीदपुर क्षेत्र पहुँचे और अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए चोरी का रास्ता चुन लिया। पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से उन्होंने पहले यह झूठी कहानी गढ़ी थी कि वे चिकित्सीय उपचार के सिलसिले में भारत आए हैं। हालांकि, पकड़े जाने के बाद उनकी पोल खुल गई और विदेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों के चलते खुफिया एजेंसियों ने भी उनसे कड़ाई से पूछताछ की है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और पुलिस अधिकारियों का बयान
इस मामले के प्रकाश में आने के बाद शहर में रह रहे विदेशी नागरिकों और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन का मुद्दा फिर से गंभीर हो गया है। पूर्व में शासन के निर्देशों के तहत पुलिस ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ अभियान चलाकर सत्यापन का कार्य किया था, किंतु शहर में बड़ी संख्या में बिना रिकॉर्ड के रह रहे कूड़ा बीनने वाले और अन्य संदिग्ध लोगों की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। डीसीपी वरुणा जोन राजेश पांडेय ने मीडिया को जानकारी दी कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से तमाम जानकारियां जुटाई जा रही हैं, तथा मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है।

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