डोटासरा ने उठाए भ्रष्टाचार के सवाल, कृषि विभाग मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

जयपुर: राजस्थान की सियासत में एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गरमाहट आ गई है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कृषि विभाग में सामने आए कथित घपले को लेकर सूबे की सरकार और कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए डोटासरा ने कहा कि जब भी किसी महकमे में अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो सबसे पहली जिम्मेदारी उस विभाग के मुखिया की होती है कि वह एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने कहा कि वह गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों का सम्मान करते हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब जांच बिना किसी भेदभाव के पूरी हो और सच जनता के सामने आए।

'गंभीर तथ्य आने के बावजूद नहीं हुई व्यापक जांच'

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग से जुड़े इस पूरे प्रकरण में अब तक कई चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने इस मामले की कोई व्यापक या उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं कराई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सीधे तौर पर एफआईआर (FIR) में दर्ज हैं या जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, उन पर अब तक कोई प्रशासनिक गाज क्यों नहीं गिरी और उनकी जवाबदेही तय करने में देरी क्यों की जा रही है?

जांच एजेंसियों से डर नहीं, फर्जी दस्तावेजों की भी हो जांच

अपने ऊपर लगने वाले राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए डोटासरा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी जांच से कोई डर नहीं है। सरकार चाहे जिस भी एजेंसी से उनके मामलों की जांच कराना चाहे, करा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक बयानों से इतर इस समय प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों का सच सामने आना ज्यादा जरूरी है। यदि किसी ने भी जाली दस्तावेजों, फर्जी डिग्री या गलत तरीकों का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरी हासिल की है, तो उसके खिलाफ भी एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिना किसी पुख्ता सबूत के सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए आरोप लगाना गलत है।

मुख्यमंत्री से मांग: 'ईमानदारी साबित हुई तो खुद करूंगा धन्यवाद'

डोटासरा ने मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर मांग की है कि कृषि विभाग के इस पूरे मामले की तह तक जाकर गहनता से जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दायरे में जो भी रसूखदार या दोषी सामने आए, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

प्रदेशाध्यक्ष का बयान: "अगर इस जांच के बाद विभागीय मंत्री और वर्तमान सरकार पूरी तरह पाक-साफ और ईमानदार साबित होती है, तो मैं खुद आगे बढ़कर उनका धन्यवाद करूँगा। लेकिन अगर इसमें कोई भी गड़बड़ी या हेरफेर पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। लोकतंत्र में जनता का भरोसा जीतने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता।"