नई औद्योगिक परियोजनाओं से बिहार में विकास को मिलेगी रफ्तार

पटना: बिहार को औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष, राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद् मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 68वीं उच्च स्तरीय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के भीतर नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने, व्यापारिक माहौल को सुगम बनाने और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न औद्योगिक प्रस्तावों पर गहन मंथन किया गया।

36 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली स्टेज-1 क्लीयरेंस; करोड़ों के फंड मंजूर

बिहार में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बोर्ड ने इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई। इसके तहत:

  • स्टेज-1 क्लीयरेंस: राज्य में कुल 1,628.60 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 36 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस (शुरुआती मंजूरी) दे दी गई है।

  • वित्तीय स्वीकृति: इसके अतिरिक्त, 07 अन्य चालू परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए 44.89 करोड़ रुपये की अंतिम वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई।

बोर्ड का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से न केवल बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

निवेशकों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम और पारदर्शिता पर जोर

बैठक के दौरान राज्य में निवेश की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) बनाने पर विशेष रणनीति तैयार की गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि उद्योगपतियों और निवेशकों को जमीन आवंटन या अन्य सरकारी स्वीकृतियों के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कैसे तुरंत दूर किया जाए। इसके लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।

उद्योग-अनुकूल नीतियां और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर देने की प्रतिबद्धता

समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बिहार को देश के अन्य विकसित राज्यों की तरह एक प्रतिस्पर्धी और उद्योग-अनुकूल (इन्वेस्टर-फ्रेंडली) राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां बदली जा रही हैं। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों को विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर), बिजली की निर्बाध आपूर्ति और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध कराना है, ताकि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां बिहार का रुख कर सकें।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

इन स्वीकृत परियोजनाओं के धरातल पर आने से बिहार के आर्थिक और औद्योगिक आधार को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई गई है। बुनियादी ढांचा मजबूत होने से न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य बिहार को पूर्वी भारत के एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।