हमारे शरीर की बनावट कई बार लोगों की सोच और धारणा को जन्म देती है. ऐसे ही एक विशेषता है – सिर में दो भंवर यानी डबल कुंडल होना. अधिकतर लोगों के सिर पर सिर्फ़ एक भंवर होता है, जो बालों की दिशा तय करता है. लेकिन कुछ लोगों के सिर पर दो भंवर होते हैं, जिसे देखकर लोग तरह-तरह की बातें करने लगते हैं. गांवों में इसे लेकर कई मज़ेदार बातें कही जाती हैं. जब किसी बच्चे के सिर पर दो भंवर दिखाई देते हैं, तो मज़ाक में कहा जाता है, “इसकी तो दो शादी तय है.” यह बात भले ही मज़ाक में कही जाती हो, लेकिन धीरे-धीरे इसे एक धारणा का रूप दे दिया गया है. अब सवाल ये उठता है कि क्या सिर में दो भंवर होना कोई विशेष बात है? क्या इससे व्यक्ति के स्वभाव या भविष्य का कोई संबंध है?
वैज्ञानिक नज़रिए से
अगर वैज्ञानिक पहलू पर नज़र डालें तो सिर पर भंवरों की संख्या पूरी तरह से हमारे डीएनए से जुड़ी होती है. बालों की बनावट, उनकी दिशा और भंवरों की संख्या विरासत में मिलती है. यानी अगर परिवार में किसी के सिर पर दो भंवर हैं, तो अगली पीढ़ी में भी ऐसा हो सकता है.
-एक अमेरिकी संस्था द्वारा किए गए शोध के अनुसार, दुनिया की केवल पांच प्रतिशत आबादी में सिर पर दो भंवर पाए जाते हैं. इससे यह तो साफ़ है कि यह सामान्य नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह किसी बड़ी बात का संकेत है.
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष शास्त्र में सिर में दो भंवर वाले लोगों को खास माना गया है. कहा जाता है कि ऐसे लोग शांत, समझदार और दूसरों की मदद करने वाले होते हैं. ये अपने काम में पूरी लगन से जुटे रहते हैं और जीवन में अच्छी तरक्की कर सकते हैं. कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि इन लोगों को वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. अगर पहली शादी में कठिनाइयां आती हैं, तो दूसरी शादी की संभावना भी हो सकती है. हालांकि, यह सिर्फ़ एक मत है, न कि कोई तयशुदा सच.
आम धारणा और सच्चाई
गांवों में सिर के दो भंवरों को लेकर जो कहावतें प्रचलित हैं, वे पूरी तरह से अनुभव या सुनाई-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं. वैज्ञानिक रूप से इसका कोई सीधा संबंध विवाह या भविष्य से नहीं होता.
असल में, यह शरीर की बनावट का एक हिस्सा है, जैसे किसी की आंखें भूरी होती हैं और किसी की नीली. कुछ लोग इसे शुभ मानते हैं, तो कुछ लोग इससे जुड़े अंधविश्वासों में उलझे रहते हैं.

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