November 2, 2026

कोर्ट की चेतावनी के बावजूद नहीं सुधरे हालात, जोजरी नदी में बह रहा जहरीला पानी

जोधपुर। राजस्थान के पाली, बालोतरा और जोधपुर की बांडी, लूणी और जोजरी नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासनिक और औद्योगिक हलचल तेज हो गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी के सुझावों के आधार पर नियम विरुद्ध चल रही औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई की गई है। हालांकि, फैक्ट्रियों के बंद होने के दावों के बीच जोजरी नदी में बहता रंगीन केमिकल युक्त पानी जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है।

30 हजार मजदूर बेरोजगार और व्यापारियों पर पुलिस की सख्ती

उद्योगपतियों और व्यापारिक संघों के अनुसार, जोधपुर में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 850 इकाइयां बंद पड़ी हैं, जिससे 30,000 मजदूर सीधे तौर पर बेरोजगार हुए हैं और करीब डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस ने नदी में अनट्रीटेड वाटर छोड़ने वाले 17-18 व्यापारियों को हिरासत में लिया है। राज्य सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए एसआईटी (SIT) का भी गठन किया है।

अन्य जिलों में प्रदूषण फैलने की आशंका पर कड़ा रुख

सख्ती के बाद कई व्यापारियों ने कपड़ा प्रोसेसिंग और धुलाई के लिए पड़ोसी जिलों का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे प्रदूषण का दायरा फैल रहा है। इस प्रवृत्ति पर स्थानीय प्रशासन और लघु उद्योग भारती ने कड़ी आपत्ति जताते हुए दोषी व्यापारियों की जमाबंदियां निरस्त करने तक की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले उद्योगों को बचाने के लिए राज्य सरकार के सहयोग से जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्लांट की स्थापना अनिवार्य की जानी चाहिए।

क्या है जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक?

यह उद्योगों (जैसे टेक्सटाइल, केमिकल) से निकलने वाले दूषित पानी के उपचार की ऐसी तकनीक है, जिससे एक बूंद भी गंदा पानी बाहर या नदी-नालों में नहीं बहता। इसमें पानी को बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट, रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) और क्रिस्टलाइज़र जैसे चरणों से गुजारकर 95 से 99 प्रतिशत तक रसायन, हैवी मेटल्स और रंग बाहर निकाल दिए जाते हैं। उपचारित पानी बिल्कुल पारदर्शी हो जाता है, जिसका उपयोग फैक्ट्रियों के कूलिंग टॉवर, बॉयलर या कपड़ा धोने की प्रक्रिया में दोबारा कर लिया जाता है।