कोटा। मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे पर बनी प्रदेश की सबसे चौड़ी टनल (सुरंग) का इंतजार थोड़ा और बढ़ गया है। हालांकि टनल के एक तरफ का फोर-लेन निर्माण कार्य ४ मई को ही पूरा हो चुका है और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से इसका सेफ्टी ऑडिट भी करा लिया गया है, लेकिन कुछ तकनीकी और सुरक्षा कारणों से फिलहाल यहां यातायात शुरू नहीं हो पाया है।
पहले तय योजना के मुताबिक इसे १५ मई से खोला जाना था, लेकिन अब वाहन चालकों को कुछ समय और इंतजार करना होगा। इस टनल के चालू होते ही दरा की नाल में लगने वाले भीषण जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और दिल्ली से गुजरात तक का सफर पूरी तरह बाधा रहित हो जाएगा।
इस परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई उप-हेडिंग्स के माध्यम से समझी जा सकती हैं:
जून के अंत तक दोनों हिस्से होंगे तैयार
टनल के दूसरे हिस्से में भी चार लेन बनाने का काम अंतिम चरण में है। वर्तमान में इसमें लाइटिंग, वेंटिलेशन फैन और अन्य जरूरी उपकरण लगाने का काम तेजी से चल रहा है, जिसे जून के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे हिस्से का भी सेफ्टी ऑडिट होगा और फिर टनल की दोनों ट्यूब्स को आम जनता के यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
दरा के जाम से मुक्ति और आपातकालीन सेवाओं को रफ्तार
मुकुन्दरा हिल्स टनल के शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को दरा के संकरे रास्ते और वहां लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी। भारी वाहनों से लेकर कारों तक, सभी वाहन बिना रुके निकल सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी बिना किसी रुकावट के बेहद कम समय में कोटा पहुंच सकेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सुरक्षा कवच
यह टनल पूरी तरह हाईटेक और सुरक्षित है। इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित पॉल्यूशन डिटेक्टर सेंसर लगाए गए हैं, जो कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन और सल्फर जैसी जहरीली गैसों को तुरंत डिटेक्ट कर लेंगे। टनल में लगे १०४ अत्याधुनिक जेट फैन इन गैसों को तुरंत बाहर फेंककर ऑक्सीजन की सप्लाई बनाए रखेंगे। इसके अलावा, पूरे सिस्टम की निगरानी 'स्काडा कंट्रोल सिस्टम' (SCADA) और AI सर्विलांस कैमरों के जरिए दोनों तरफ बने कंट्रोल रूम से की जाएगी, जो वाहनों की स्पीड और अन्य गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
१०० साल की गारंटी और इमरजेंसी पैसेज की सुविधा
लगभग १,००० करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सुरंग की उम्र १०० साल आंकी गई है। सुरक्षा के लिहाज से ३०० से ४०० मीटर की दूरी पर दोनों टनल (आने और जाने वाले रास्ते) को आपस में जोड़ने के लिए १२ स्थानों पर कनेक्टिंग पैसेज बनाए गए हैं। किसी भी दुर्घटना या आपातकाल की स्थिति में वाहनों को सुरक्षित निकालने में यह पैसेज मददगार होंगे। इसके साथ ही टनल के अंदर यात्रियों के लिए इंटरनेट (Wi-Fi) की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
महत्वपूर्ण आंकड़े (फैक्ट फाइल)
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काम की शुरुआत: साल २०१९
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प्रोजेक्ट की कुल लागत: लगभग १,००० करोड़ रुपए
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टनल की चौड़ाई: ३८ मीटर (प्रदेश की सबसे चौड़ी टनल)
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टनल की लंबाई: ३.३ किलोमीटर
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कट एंड कर्व: १.६ किलोमीटर
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कुल लंबाई: ४.९ किलोमीटर

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