October 22, 2026

बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी पर विवाद, 74 तस्वीरों को हटाने का मामला

नई दिल्ली। कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। रेहान ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित बीकानेर हाउस के प्रबंधन ने उनकी प्रदर्शनी से कई अहम कलाकृतियों को जबरन हटवा दिया है। इन तस्वीरों में छात्रों और युवाओं के विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों के दृश्यों को दर्शाया गया था।

रेहान वाड्रा का इंस्टाग्राम पोस्ट और आरोप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए रेहान ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने बताया कि उनकी प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रबंधन ने उन्हें कलाकृतियों का एक बड़ा हिस्सा हटाने के लिए मजबूर कर दिया। रेहान के मुताबिक, अधिकारियों का यह तर्क था कि यह कंटेंट आपत्तिजनक है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि प्रबंधन ने उन्हें तिरंगे की तस्वीरें हटाने का भी निर्देश दिया था, जिसे उन्होंने मानने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि वह राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर किसी भी कीमत पर नहीं हटाएंगे।

पूरा कलेक्शन दूसरी जगह प्रदर्शित करने की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए रेहान ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह शो आंशिक रूप से जारी रहेगा। हालांकि, यदि जरूरत महसूस हुई तो वह इस प्रदर्शनी के लिए कोई अन्य वैकल्पिक जगह तलाशेंगे और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी सभी तस्वीरों के पूरे कलेक्शन को दोबारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करेंगे।

पवन खेड़ा ने सेंसरशिप पर साधा निशाना

इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी भी रेहान के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कला प्रदर्शनी पर लगाई गई इस सेंसरशिप को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेंसर की कैंची से देश का तिरंगा भी नहीं बच पा रहा है, तो फिर समस्या कला में नहीं बल्कि सत्ता की सोच में है।

सत्ता पर वैचारिक डर का आरोप

पवन खेड़ा ने आगे दावा किया कि बीकानेर हाउस ने शो शुरू होने से ठीक पहले लगभग 74 कलाकृतियों को केवल इसलिए हटवा दिया क्योंकि उन्हें राजनीतिक बता दिया गया था, जबकि उन तस्वीरों में केवल आम विरोध-प्रदर्शनों को दिखाया गया था और उनमें कुछ भी भड़काऊ नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार को अब केवल स्वतंत्र विचारों से ही नहीं, बल्कि विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों और खुद राष्ट्रीय ध्वज से भी डर लगने लगा है।