September 12, 2026

59 बिजली संयंत्रों में कोयले का टोटा, सिर्फ 3 दिन का स्टॉक; बढ़ सकता है बिजली पर दबाव

नई दिल्ली। देश के ऊर्जा क्षेत्र के सामने एक बार फिर गहरा संकट खड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के लगभग एक तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार खतरनाक रूप से घटकर बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है।

कोयला संकट और बिजली की भारी मांग

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर तक देश के 59 ऐसे बिजली संयंत्र थे, जहां कोयले का भंडार कुल जरूरत का 25 प्रतिशत से भी कम यानी मात्र 3 दिन का बचा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषक मनोज कुमार के मुताबिक, यह घटता भंडार ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चेतावनी है। गर्मी के लंबे दौर के कारण मई में देश की बिजली की अधिकतम मांग 270.70 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जो वर्तमान में भी लगातार 267 गीगावॉट के आसपास बनी हुई है। बैटरी स्टोरेज की कमी और जलाशयों में पानी का स्तर घटने से ग्रिड पर भारी दबाव है।

आपूर्ति बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास

इस संकट से निपटने के लिए सरकार और ऊर्जा कंपनियां जुटी हुई हैं। भारतीय रेलवे ने संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए रैक की संख्या 3 सितंबर के 370 से बढ़ाकर 6 सितंबर को 444 कर दी है। वहीं, कोल इंडिया ने अपनी खदानों पर लगभग 76 मिलियन मीट्रिक टन पर्याप्त स्टॉक होने का दावा करते हुए सड़क मार्ग से भी आपूर्ति तेज कर दी है।

राजपुरा प्लांट की यूनिट बंद होने से पंजाब में बढ़ी मुश्किलें

पटियाला। पंजाब में राजपुरा थर्मल प्लांट की 700 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-1 शुक्रवार को तकनीकी खराबी के चलते बंद हो गई है। इसके अलावा रोपड़ थर्मल की यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की यूनिट नंबर-2 पहले से ही बंद चल रही हैं, जिससे राज्य में बिजली संकट और गहरा गया है।