रायपुर (छत्तीसगढ़)। रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवहन विभाग के प्रशासनिक कामकाज की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश भर में एक सुरक्षित, सुगम और पूरी तरह आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के संबंध में कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने सड़क सुरक्षा को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली असामयिक मौतों को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करना होगा।
सड़क सुरक्षा और 'जीरो फेटेलिटी' का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा मूल लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी लाना नहीं है, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली प्रत्येक संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना होने से पहले उसकी रोकथाम और दुर्घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति को त्वरित सहायता एवं चिकित्सा उपचार—इन दोनों ही स्तरों पर व्यवस्थाओं को बेहद मजबूत करना होगा। उन्होंने ‘जीरो फेटेलिटी’ (शून्य मृत्यु दर) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगरीय निकायों सहित सभी संबंधित विभागों को एक विस्तृत और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से जुड़ा एक साझा विषय है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित सड़क संरचना, यातायात के नियमों का प्रभावी अनुपालन, व्यावसायिक एवं निजी वाहनों की तकनीकी फिटनेस, प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता तथा दुर्घटना के उपरांत त्वरित चिकित्सीय सहायता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर एक साथ समानांतर रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।
ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधारात्मक कार्य में तेजी
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशभर में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और 'ब्लैक स्पॉट' की शिनाख्त कर वहाँ आवश्यक सुधारात्मक एवं सुरक्षात्मक उपाय प्राथमिकता के आधार पर करने के सख्त निर्देश दिए। बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई कि वर्तमान में राज्य के कुल 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन सभी कार्यों को तीव्र गति से पूरा करने तथा दुर्घटनाओं के मूल कारणों का नियमित विश्लेषण कर भविष्य के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सड़क दुर्घटना के घटित होने के बाद का शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक होता है। घायल व्यक्ति तक जितनी जल्दी आपातकालीन सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुँचेगी, उसका जीवन बचाने की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाएगी। उन्होंने दुर्घटना की त्वरित सूचना, एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक सुगम पहुँच और वहाँ मिलने वाले उपचार की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर आपसी तालमेल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नागरिकों की सहभागिता और सरकारी योजनाएं
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री साय ने 'पीएम-राहत योजना' और 'राहवीर योजना' का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक यह स्पष्ट संदेश पहुँच Wचाहिए कि सड़क पर किसी दुर्घटना को देखकर घबराएं नहीं, बल्कि घायल व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आएँ।
बैठक में अवगत कराया गया कि पीएम-राहत योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों की अवधि तक 1.50 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान किया गया है। वहीं, 'राहवीर योजना' सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्ति की समय पर मदद करने वाले मददगार नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने से सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिलने में बहुत बड़ी सहायता मिल सकती है।
दूरस्थ अंचलों तक सार्वजनिक परिवहन का विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ की समीक्षा करते हुए इस सेवा को और अधिक विस्तृत रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे ग्रामीण, वनांचल और दुर्गम दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए, जहाँ वर्तमान में नियमित सार्वजनिक परिवहन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय बाजारों जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुँचने का एक सशक्त आधार है।
दूरस्थ गाँवों को बस सेवा से जोड़ने का सीधा अर्थ वहाँ के निवासियों के लिए विकास के अनेक नए अवसरों के द्वार खोलना है। शासन का यह सतत प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के अंतिम छोर पर जीवनयापन करने वाले व्यक्ति तक भी सुगम, सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन सेवा पहुँचे। बैठक में यह जानकारी दी गई कि इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधाओं से वंचित अन्य क्षेत्रों का सर्वे कराकर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने और आवश्यकतानुसार इस योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए।
कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा से सुगम हुआ सफर
बैठक के दौरान दूरस्थ और अति-दुर्गम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के सकारात्मक और दूरगामी प्रभावों की भी सराहना की गई। कोंटा से जगरगुंडा के मध्य पहली बार प्रारंभ की गई बस सेवा से क्षेत्र के आम नागरिकों को आवागमन में अभूतपूर्व सुविधा प्राप्त हुई है। यह बताया गया कि आंतरिक और सुदूर इलाकों से इस यात्रा को पूरा करने में पहले लगभग छह घंटे तक का लंबा समय लग जाता था, किंतु नियमित बस सेवा शुरू होने के बाद अब यही सफर मात्र 45 मिनट के भीतर तय हो रहा है। इससे स्थानीय आदिवासियों और नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँचना बेहद आसान हो गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी राज्य में विकास की गति को तेज करने का एक प्रमुख माध्यम है। जिन क्षेत्रों में वर्षों तक सार्वजनिक परिवहन सीमित या नगण्य रहा है, वहाँ नियमित बस सेवा का संचालन आम नागरिकों के दैनिक जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग का समन्वय
प्रदेश में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की सुरक्षित और सुविधाजनक आवाजाही सुनिश्चित करने में परिवहन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए उन्नत सार्वजनिक परिवहन और कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाओं पर युद्ध स्तर पर कार्य किया जाए। पर्यटकों के लिए सुगम आवागमन की व्यवस्था होने से प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य अनुषांगिक सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों तथा रोजगार के नए अवसरों के रूप में मिलेगा।
वाहनों की फिटनेस जाँच और हाई सिक्योरिटी प्लेट
वाहनों की तकनीकी फिटनेस जाँच व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने इसे और अधिक पारदर्शी, प्रभावी तथा तकनीक-आधारित बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) की वर्तमान कार्यप्रणाली और नए केंद्रों की स्थापना के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों की तकनीकी स्थिति का निष्पक्ष और सख्त परीक्षण सड़क सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से फिटनेस जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों में वृद्धि होगी। उन्होंने 15 वर्ष की समयावधि पूरी कर चुके पुराने वाहनों के निर्धारित नियमों के तहत नवीनीकरण और फिटनेस से जुड़े प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने के अभियान को पूरी तरह सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने के साथ-साथ वाहन मालिकों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
लंबित चालानों की रिकवरी और ई-ट्रैक व्यवस्था
सड़क नियमों के उल्लंघन पर शिकंजा कसते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित चालानों की वसूली (रिकवरी) में तेजी लाने और आधुनिक चालान प्रणाली का अधिकाधिक उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने यातायात के नियमों का पालन सुनिश्चित करवाने के वास्ते तकनीक के अधिकतम प्रयोग पर विशेष जोर दिया।
बैठक में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए विकसित की जा रही अत्याधुनिक 'ई-ट्रैक' व्यवस्था पर भी व्यापक चर्चा हुई। इसके अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित प्रणालियों के माध्यम से पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता आए और यह पुख्ता तौर पर सुनिश्चित हो सके कि केवल आवश्यक प्रशिक्षण और दक्षता प्राप्त करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति ही सड़कों पर वाहन चलाएँ। सड़क सुरक्षा की दृष्टि से एक प्रशिक्षित और अनुशासित चालक की भूमिका सबसे अहम होती है।

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