October 8, 2026

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पीएम मोदी ने बताया भारत की अगली बड़ी दिशा, कैप्टन स्मित मच्छार का भी उल्लेख

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने सार्वजनिक जीवन में सफलतापूर्वक 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में एक भव्य 'विकसित भारत संकल्प सभा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक हालिया घटना का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज पूरी दुनिया में भारतीय पायलटों की कार्यकुशलता और सूझबूझ की चर्चा हो रही है, और वह दिन भी अब दूर नहीं है जब पूरी वैश्विक बिरादरी ‘मेड-इन-इंडिया’ विमानों की बात करेगी।

लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दूरदर्शी नीतियों और कड़ी मेहनत की जरूरत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि देश के सामने रखे गए बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अत्यंत दूरदर्शी नीतियों का निर्माण करना होगा और उनके क्रियान्वयन के लिए पूरी मेहनत से जुटना होगा। यह समय विश्राम करने का बिल्कुल नहीं है, बल्कि पूरे जोश, ऊर्जा और समर्पण के साथ आगे बढ़ने तथा खुद को राष्ट्र सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित करने का है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने आतंकवाद के आकाओं को उनके घर में घुसकर करारा जवाब दिया है और दुश्मनों को भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का कड़ा अहसास कराया है।

भारतीय पायलट से लेकर ‘मेड-इन-इंडिया’ विमान तक का बड़ा सपना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि आज वैश्विक स्तर पर भारतीय पायलटों की काबिलियत की सराहना हो रही है, और आने वाले निकट भविष्य में दुनिया ‘मेड-इन-इंडिया’ विमानों की सफलता की भी चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े लक्ष्य केवल भाषणों या बातों से कभी हासिल नहीं किए जा सकते; इसके लिए ऐसी ठोस नीतियां बनानी होंगी जो आने वाले समय की हर जरूरत को समय रहते समझ सकें। इसके साथ ही देश को तीव्र गति से आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात अथक परिश्रम करना होगा। पीएम मोदी ने दोटूक शब्दों में कहा कि अभी रुकने या पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं है, बल्कि देश को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने के लिए पूरी ताकत लगानी होगी।

ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई

आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में आए ऐतिहासिक बदलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के सरगनाओं पर उनके घरों में घुसकर सटीक प्रहार किया है। आतंकवाद के विरुद्ध भारत की इस घर में घुसकर की गई कार्रवाई ने दुश्मनों को हमारी शक्ति का वास्तविक अहसास करा दिया है। उनके इस बयान में देश की सुरक्षा को लेकर सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नीति का स्पष्ट संदेश झलकता है।

25 वर्षों का जनविश्वास और अनुभव देश की सबसे बड़ी पूंजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों का अटूट जनविश्वास और लंबा प्रशासनिक अनुभव उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूंजी केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि पूरे देश की है और मां भारती की हर एक संतान इस पूंजी की वास्तविक अधिकारी है। अपने शुरुआती स्कूल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति से सीखने की ललक उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी ही मानते हैं और उन्होंने ईश्वर से हमेशा यही प्रार्थना की है कि उनके भीतर सीखने की इच्छा कभी भी कम न हो।

'जिसने गिराया, उसने उठना सिखाया; विरोध ने लोकतंत्र की ताकत समझाई'

प्रधानमंत्री ने आत्मમंथन करते हुए कहा कि जब वह अपने अतीत की ओर मुड़कर देखते हैं, तो उनके मन में केवल कृतज्ञता का भाव आता है। जीवन में घटी हर एक घटना ने उन्हें कुछ न कुछ नया सिखाया है। जिस किसी ने उन्हें गिराने का प्रयास किया, उसी ने उन्हें जीवन में मजबूती के साथ खड़ा होना सिखाया, और जिन लोगों ने उनका विरोध किया, उन्होंने उन्हें लोकतंत्र की वास्तविक ताकत को गहराई से समझने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन का हर एक संकट उनके धैर्य की बड़ी परीक्षा रहा है, जबकि हर सफलता ने उन्हें और बड़े लक्ष्यों की तरफ बढ़ने की शक्ति दी है।

'हम सेवक हैं, और राष्ट्र की सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है'

प्रधानमंत्री ने प्राचीन वेदों से लेकर स्वामी विवेकानंद तक के महान विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस राष्ट्र ने हमेशा महान मानवीय परंपराओं को आगे बढ़ाया है, जिसकी हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत है, वहाँ उन्हें कभी यह अकेलापन महसूस नहीं हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि हम सब देश के सेवक हैं और सेवा करना ही हमारा एकमात्र धर्म है। दीन-दुखियों और वंचितों की सेवा करना भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। देश और समाज की सेवा की यही अटूट भावना सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी और सच्ची ताकत है।

संकल्पों को नई ऊर्जा देने और 'हम करके रहेंगे' का संकल्प लेने का दिन

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक जीवन की अपनी इस लंबी यात्रा के हर कदम पर साथ निभाने वाले सभी स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं का हृदय से नमन किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल पुरानी यादों को याद करने का नहीं है, बल्कि अपने संकल्पों को नई ऊर्जा से लैस करने का अवसर है। पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा, ‘हम करके रहेंगे। वी विल डू It।’ उन्होंने लाल किले से दिए गए ‘सबका प्रयास’ के संदेश को दोहराते हुए कहा कि भारत को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने के लिए इसी जज्बे की सबसे अधिक आवश्यकता है।

विकसित भारत से लेकर ओलिंपिक्स तक, प्रधानमंत्री ने लगवाए बड़े संकल्पों के नारे

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं से देश के भविष्य से जुड़े बड़े-बड़े संकल्पों के नारे लगवाए। उन्होंने जोश भरते हुए कहा:

  • ‘विकसित भारत बाय 2047, वी विल डू इट।’

  • ‘दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी, वी विल डू इट।’

  • ‘आत्मनिर्भर भारत, वी विल डू इट।’

  • ‘भविष्य में ओलिंपिक्स का आयोजन, वी विल डू इट।’

  • ‘अंतरिक्ष में भारत के और बड़े कदम, वी विल डू इट।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासियों के भीतर की यह ऊर्जा और आत्मविश्वास असीम है। जहाँ इस तरह का राष्ट्रप्रेम खून में दौड़ता हो, उस देश की रफ्तार को कोई ताकत नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की इस शानदार यात्रा को लोग एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखते हैं, लेकिन अब हमें इन उपलब्धियों को भविष्य के और भी बड़े और विराट लक्ष्यों की मजबूत नींव बनाना होगा।