बच्चों की शरारत बनी हादसे की वजह, मधुमक्खियों के हमले में बुजुर्ग की मौत

आजमगढ़| उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के फरिहा कस्बे के अंतर्गत आने वाले कुरैशी मोहल्ले में रहने वाले इश्तियाक कुरैशी (65 वर्ष) की मधुमक्खियों के भीषण और जानलेवा हमले में मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद से जहां पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पूरे गांव और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

बकरियां चराने गए थे बुजुर्ग, लड़कों की नादानी पड़ी भारी

परिजनों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार की शाम को हुई। बुजुर्ग इश्तियाक कुरैशी हमेशा की तरह अपनी बकरियों को चराने के लिए फरिहा कस्बे में स्थित एक सरकारी ट्यूबवेल के पास गए हुए थे। उसी दौरान वहां कुछ स्थानीय लड़के पास में ही मौजूद आम के एक बड़े पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश कर रहे थे और इसके लिए वे पेड़ पर लगातार कंकड़ मार रहे थे।

बदकिस्मती से, उसी आम के पेड़ की टहनी पर मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लगा हुआ था। लड़कों द्वारा फेंका गया एक कंकड़ सीधे जाकर मधुमक्खियों के छत्ते पर लग गया। कंकड़ टकराते ही हजारों मधुमक्खियां बुरी तरह भड़क गईं और उन्होंने झुंड बनाकर आसपास मौजूद लोगों पर हमला बोल दिया। पत्थर मारने वाले लड़के तो फुर्ती दिखाते हुए मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन उम्रदराज होने के कारण इश्तियाक कुरैशी वहां से समय पर नहीं भाग सके और मधुमक्खियों के जानलेवा झुंड के बीच बुरी तरह फंस गए।

जान बचाने के लिए हौज के पानी में उतरे, फिर भी नहीं छोड़ा पीछा

हजारों मधुमक्खियों ने इश्तियाक के पूरे शरीर पर बेरहमी से डंक मारना शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले से घबराकर अपनी जान बचाने के लिए वे पास में ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पानी से लबालब भरे हौज (कुंड) में कूद गए। उन्होंने खुद को बचाने के लिए काफी देर तक पानी के भीतर डुबोकर रखा। इसके बावजूद, शिकारी मधुमक्खियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वे पानी की सतह के ठीक ऊपर झुंड बनाकर मंडराती रहीं।

काफी देर तक पानी में रहने के कारण जब बुजुर्ग को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी, तो वे लाचार होकर पानी से बाहर निकले और खेतों की तरफ दौड़ पड़े। लेकिन खूंखार मधुमक्खियों के दल ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उनके चेहरे, सिर और पूरे शरीर पर लगातार सैकड़ों डंक मारते रहे।

हमले से खेत में ही हुए अचेत; कंबल ओढ़कर युवकों ने बचाया

मधुमक्खियों के लगातार और भीषण हमले के कारण बुजुर्ग का शरीर जहर से नीला पड़ने लगा और वे तड़पते हुए खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़े। मैदान में चारों तरफ मधुमक्खियों का भयंकर आतंक फैला हुआ था, जिसके कारण शुरुआती कुछ मिनटों तक कोई भी ग्रामीण या राहगीर उनके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

बाद में गांव के कुछ साहसी युवकों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने अपने शरीर पर मोटे कंबल ओढ़े और धुएं व आग की मदद से बड़ी मशक्कत के बाद मधुमक्खियों को वहां से खदेड़ा। युवकों ने तुरंत अचेत हो चुके इश्तियाक को वहां से बाहर निकाला और इलाज के लिए फरिहा के एक नजदीकी निजी अस्पताल लेकर भागे।

जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बुजुर्ग की गंभीर और नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में डॉक्टरों की विशेष टीम ने रातभर उनके शरीर से जहर निकालने और उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक डंक मारे जाने के कारण देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इश्तियाक की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीण और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं।