दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में इस बार जाट बनाम मीणा समुदाय की दिलचस्प सियासी जंग देखने को मिल रही है। मुख्य प्रतिद्वंद्वी संगठन एनएसयूआई ने जहां अध्यक्ष पद पर राजस्थान के मीणा समुदाय के चेहरे पर दांव खेला है, वहीं एबीवीपी ने जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। पारंपरिक रूप से दोनों संगठन अमूमन जाट-जाट या जाट-गुर्जर उम्मीदवारों को आमने-सामने रखते आए हैं, लेकिन इस बार चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए गए हैं।
जातीय समीकरण और टिकट वितरण
एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद के साथ-साथ सहसचिव पद पर भी राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले चेहरे को टिकट देकर एक मजबूत सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी राजस्थान से हैं, जिसके चलते यह समीकरण तैयार हुआ है। दूसरी ओर, एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर जाट, उपाध्यक्ष पद पर मौर्य, सचिव पद पर गुर्जर और सहसचिव पद पर राजपूत समुदाय के प्रत्याशी को उतारकर चतुर्दिक सियासी दांव खेला है।
एनएसयूआई में अंदरूनी खींचतान और झड़प
टिकट बंटवारे को लेकर एनएसयूआई के भीतर भारी असंतोष और अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। दीपांशु शौकीन और विशेष यादव टिकट की प्रबल उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह वीर चतरथ और गोपाल चौधरी को उम्मीदवार बना दिया। इससे नाराज दावेदार आपस में भिड़ गए और समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प में गोपाल चौधरी के सिर में गंभीर चोटें आईं। टिकट न मिलने से खफा दीपांशु शौकीन ने अब बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है और उनका नामांकन भी स्वीकृत हो चुका है। वहीं, विशेष यादव के बागी तेवर भी संगठन के वोटों में सेंध लगा सकते हैं।
बौद्ध अध्ययन विभाग का चुनावी दबदबा
डूसू चुनावों में इस बार भी 'बौद्ध अध्ययन विभाग' का दबदबा कायम है। अंतिम सूची के कुल 20 उम्मीदवारों में से अकेले 8 उम्मीदवार इसी विभाग से ताल्लुक रखते हैं। एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों के ही अध्यक्ष पद के उम्मीदवार इसी विभाग से हैं। इसके अलावा एनएसयूआई के उपाध्यक्ष, सचिव और सहसचिव पद के उम्मीदवार भी इसी विभाग से आते हैं। डीयू में यह कोई नया ट्रेंड नहीं है, क्योंकि पिछले साल भी इसी विभाग से आठ उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। पिछले कुछ वर्षों से यह चर्चा जोरों पर है कि डूसू में टिकट पक्का करने के लिए छात्र जानबूझकर बौद्ध अध्ययन विभाग में दाखिला लेते हैं।

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