जबलपुर। मध्य प्रदेश की सरकारी साइकिल वितरण योजना में हुए बड़े भ्रष्टाचार के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जांच में हो रही अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और अगले 60 दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी करने का स्पष्ट आदेश दिया है।
रायसेन जिले की साइकिल योजना में गबन का मामला
यह पूरा मामला रायसेन जिले से जुड़ा हुआ है, जहां स्कूली छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए मिलने वाली सरकारी राशि में बड़े पैमाने पर गबन और दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद EOW से इसकी औपचारिक जांच की मांग की गई थी।
EOW की सुस्त कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट की फटकार
विभागीय स्तर से जांच की अनुमति मिलने के बाद भी EOW द्वारा लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने के कारण यह मामला हाईकोर्ट जा पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि जब सरकार से अनुमति पहले ही मिल चुकी है, तो जांच में इस तरह की सुस्ती और देरी क्यों बरती जा रही है।
DG के आश्वासन पर मिला 60 दिन का समय
मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW के महानिदेशक (DG) उपेंद्र जैन व्यक्तिगत रूप से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत के समक्ष अंडरटेकिंग देते हुए स्वीकार किया कि मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि आगामी 60 दिनों के भीतर इस पूरे भ्रष्टाचार प्रकरण की निष्पक्ष जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।

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