September 12, 2026

यूपी में स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल, फिरोजाबाद ट्रॉमा सेंटर में फर्श पर इलाज

फिरोजाबाद। बदलते मौसम के बीच वायरल बुखार के बढ़ते प्रकोप और सड़क हादसों के चलते फिरोजाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। अस्पताल के इमरजेंसी, सर्जरी और मेडिसिन वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं, जहां 30 से अधिक गंभीर मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर जीवन की जंग लड़ रहे हैं। जगह की भारी कमी के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने किसी भी मरीज को बैरंग न लौटने का संकल्प लेते हुए फर्श और बेंचों पर ही इलाज शुरू किया है।

बेड की किल्लत और जमीन पर इलाज

शुक्रवार को अस्पताल की ओपीडी में करीब 1,800 मरीज पहुंचे, जिससे व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सांस लेने में गंभीर तकलीफ के बाद पहुंचे कृष्णा नगर निवासी प्रेमदास और सड़क हादसे में घायल 15 वर्षीय कन्हैया को बेड न मिलने के कारण फर्श पर ही चादर बिछाकर ड्रिप व उपचार दिया गया। इसके अलावा जनरल वार्ड में जगह के अभाव में कई मरीजों को एक ही बेड पर साझा करना पड़ा। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सांस फूलने और ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

संवेदनाओं को तार-तार करती लापरवाही

अस्पताल परिसर में एक तरफ जहां डॉक्टरों का मानवीय चेहरा दिखा, वहीं लापरवाही का मामला भी सामने आया। सिरसागंज से आईं चक्कर से पीड़ित टीबी रोगी सोनी को ट्रॉमा सेंटर के स्टाफ ने बिना पूरी तरह ठीक हुए डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों के गिड़गिड़ाने के बावजूद जब उन्हें मदद नहीं मिली, तो बीमार महिला को बाहर बेंच पर लेटना पड़ा। हालांकि, राहगीरों द्वारा वीडियो बनाए जाने और फजीहत होने के डर से अस्पताल स्टाफ ने आनन-फानन में महिला को दोबारा वार्ड के भीतर पहुंचाया।

क्रास-इन्फेक्शन का बढ़ता गंभीर खतरा

अस्पताल में मरीजों की अत्यधिक भीड़ और बेड की भारी कमी के कारण संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। स्वाइन फ्लू और टीबी जैसे संक्रामक रोगों से पीड़ित मरीजों के ठीक बगल में अन्य सामान्य रोगियों का इलाज किए जाने से 'क्रॉस-इन्फेक्शन' की आशंका बढ़ गई है, जो स्वस्थ हो रहे मरीजों के लिए नई मुसीबत बन सकती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवीन जैन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौसम में अचानक बदलाव के चलते बुखार, उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है। अस्पताल किसी भी मरीज को निराश नहीं लौटा रहा है, जिसके कारण यह अस्थाई दबाव बना है। स्थिति से निपटने के लिए 20 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से कराई गई है और उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में शुरुआती इलाज नजदीकी केंद्रों से लें।