BJP सांसद मेधा कुलकर्णी का दावा, ‘ब्राह्मण होने की वजह से मुझे आगे बैठने से रोका गया’

मुंबई। महाराष्ट्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर एक नया आंतरिक गतिरोध और गंभीर विवाद उजागर हुआ है। भाजपा की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी ही पार्टी के स्थानीय विधायक अभिमन्यु पवार पर सनसनीखेज आरोप मढ़े हैं। कुलकर्णी का दावा है कि पुणे शहर में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान उन्हें महज उनकी ब्राह्मण पहचान के कारण मुख्य मंच की अग्रिम पंक्ति (पहली लाइन) में बैठने से दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका गया। दूसरी ओर, आरोपित विधायक अभिमन्यु पवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को मात्र एक प्रशासनिक गलतफहमी का नतीजा करार दिया है।

मराठा मेधावी छात्र सम्मान समारोह और प्रोटोकॉल पर रार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद पुणे में आयोजित उस गौरव समारोह के दौरान उत्पन्न हुआ, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) सहित अन्य कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करने वाले मराठा समुदाय के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जा रहा था। इस विशेष कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सांसद मेधा कुलकर्णी का तर्क है कि आयोजन में कई कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के चलते, तय शासकीय प्रोटोकॉल और वरिष्ठता के नियमों के अनुसार पहली पंक्ति की सोफा सीट पर बैठना उनका वैधानिक अधिकार था।

जातिगत टिप्पणी और सिटिंग अरेंजमेंट को लेकर तीखी बहस

सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि कार्यक्रम स्थल पर कोई अन्य सांसद मौजूद नहीं था, जिसके कारण वहां तैनात प्रोटोकॉल अधिकारियों का भी यही मत था कि उन्हें अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया जाए। कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि विधायक अभिमन्यु पवार स्वयं अग्रिम दीर्घा में बैठना चाहते थे और जब ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों ने स्थापित नियमों का हवाला दिया, तो पवार ने कथित तौर पर वहां जाति का मुद्दा उठा दिया। सांसद का दावा है कि विधायक ने अधिकारियों से कहा कि चूंकि यह आयोजन विशेष रूप से मराठा समाज के युवाओं के लिए है, इसलिए यदि एक ब्राह्मण चेहरा पहली पंक्ति में बैठेगा तो समाज में अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।

विधायक पवार की सफाई और आंतरिक मतभेदों की गूंज

इन तीखे आरोपों पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए विधायक अभिमन्यु पवार ने कहा कि उनके बयान को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। पवार के मुताबिक, उन्होंने केवल इतना सुझाव दिया था कि अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक मागास विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र पाटिल को पहली पंक्ति में आसीन किया जाए, जबकि बाकी के सभी सांसदों और विधायकों को सम्मानपूर्वक दूसरी पंक्ति में बैठना चाहिए। उन्होंने बल देकर कहा कि इस पूरी बातचीत में जाति सूचक या भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं थी और वहां उपस्थित अनेक गणमान्य लोग इसके गवाह हैं। बहरहाल, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक इस पारिवारिक कलह पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इस सार्वजनिक विवाद ने सूबे की राजनीति में जातीय संवेदनशीलता की बहस को हवा दे दी है।