नई दिल्ली । भारत ने अपनी नई सैटेलाइट ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह कोई सामान्य या नियमित उपग्रह प्रक्षेपण नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर है जिसे समझना बेहद आवश्यक है। इस मिशन में ‘नॉटी बॉय’ के नाम से पहचाने जाने वाले रॉकेट ने अपनी पिछली सभी शरारतों को पीछे छोड़ते हुए बेहद सटीक प्रदर्शन किया। यह नॉटी बॉय दरअसल उस रॉकेट का वैज्ञानिक उपनाम है जो पृथ्वी से उपग्रहों को अंतरिक्ष में लेकर जाता है। पहले यह रॉकेट अपने निर्धारित पथ से भटक जाता था, जिससे वैज्ञानिकों ने इसे यह अनौपचारिक नाम दिया था। लेकिन इस बार इसने सैटेलाइट को ठीक उसी ऊँचाई और स्थान पर सफलतापूर्वक पहुँचाया जहाँ उसे स्थापित होना था, जिससे वैज्ञानिकों में आत्मविश्वास और संतोष बढ़ा है कि इसमें किए गए तकनीकी बदलाव पूरी तरह से कामयाब रहे हैं।
यह नई सैटेलाइट, ईओएस-05, ‘अर्थ ऑब्ज़रवेशन सैटेलाइट’ (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह) श्रृंखला का पाँचवाँ उपग्रह है। ‘अर्थ ऑब्ज़रवेशन सैटेलाइट’ का मुख्य कार्य पृथ्वी पर लगातार निगरानी रखना है, लेकिन ईओएस -05 एक सामान्य निगरानी उपग्रह से कहीं अधिक खास है। यह सैटेलाइट ‘जियोस्टेशनरी’ श्रेणी की है। जियोस्टेशनरी का अर्थ है कि यह अंतरिक्ष में एक ही स्थान पर स्थिर खड़ी रहेगी और लगातार पृथ्वी की तस्वीरें और डेटा भेजती रहेगी। सामान्य उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए तस्वीरें भेजते हैं, जिससे किसी एक स्थान की अगली तस्वीर के लिए उन्हें अपना अगला चक्कर पूरा करने का इंतजार करना पड़ता है। इसके विपरीत, एक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट एक ही बिंदु पर निरंतर निगरानी बनाए रख सकती है, ठीक वैसे ही जैसे एक स्थिर कैमरा लगातार फुटेज रिकॉर्ड करता है। इससे किसी भी स्थान पर हो रही गतिविधियों का वास्तविक समय में अधिक सटीक और विस्तृत अवलोकन संभव हो पाता है। भारत के लिए ईओएस -05 सैटेलाइट एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। कल्पना कीजिए, यदि कोई प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ में कोई बिल्डिंग बह रही हो, तो सामान्य सैटेलाइट केवल उसकी पहले और बाद की तस्वीरें ही दे पाती है। लेकिन जियोस्टेशनरी सैटेलाइट उस घटना को लगातार रिकॉर्ड कर सकती है, जिससे यह देखा जा सकता है कि कैसे और कब वह बिल्डिंग पानी में बही। इस तरह की क्षमता भारत को निगरानी, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, रक्षा और सीमा सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व बढ़त देगी। यह न केवल भारत की सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करेगी बल्कि पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर भी निरंतर और विस्तृत नज़र रखने में सहायक होगी। इस उपलब्धि से भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक नया अध्याय जुड़ा है, जो देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की पंक्ति में और अधिक सशक्त स्थान दिलाता है।

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