नई दिल्ली: देश में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी एक विशेषज्ञ राष्ट्रीय टीम को गुजरात रवाना किया है। यह टीम न सिर्फ इस संक्रमण के फैलाव और इसके कारणों की गहराई से जांच कर रही है, बल्कि राज्य प्रशासन के साथ मिलकर इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य तैयारियों को भी पूरी तरह मजबूत करने में जुटी हुई है।
चांदीपुरा वायरस का प्रकोप और पिछले दो साल के प्रयास
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, चांदीपुरा वायरस का संक्रमण कोई नया नहीं है और यह पहले भी कई बार सामने आ चुका है, हालांकि इसका पिछला बड़ा प्रकोप करीब दो साल पहले देखा गया था। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर के विशेषज्ञ पिछले दो वर्षों से लगातार गुजरात में इस बीमारी के मूल कारणों की तलाश कर रहे हैं। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर यह वायरस कहां से पनप रहा है और इसके फैलने के पीछे असल वजहें क्या हैं। इस पर नजर रखने के लिए राज्य स्तर पर पहले से ही एक विशेष टास्क फोर्स सक्रिय रूप से काम कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय टीमों द्वारा की जा रही तैयारियां
इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को रोकने और नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र सरकार ने भी कड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात के अलावा राजस्थान में भी राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजेओआरटी) को तैनात कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम के उपायों को तेज करने के साथ-साथ राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के सहयोग से एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हालात से तुरंत निपटने के लिए एनसीडीसी के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।

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