रतलाम/इंदौर। 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली कहावत रतलाम के एक शातिर अपराधी पर बिल्कुल सटीक बैठ गई। पिछले 4 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा एक ट्रैक्टर चोर, जो साधु का भेष धरकर इंदौर के मंदिरों में छिपा था, आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया। पुलिस की पैनी नजर ने 'विष्णु महाराज' बने इस ढोंगी के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
ऐसे हुआ 'साधु' पर शक
इंदौर पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर के मंदिरों में एक संदिग्ध व्यक्ति साधु के भेष में रह रहा है। हालांकि उसने लंबी दाढ़ी बढ़ा रखी थी और भगवा वस्त्र धारण किए थे, लेकिन उसकी गतिविधियां और रहन-सहन सामान्य साधुओं जैसी नहीं थी। जब पुलिस ने उससे सामान्य पूछताछ की, तो वह घबरा गया और बार-बार अपने बयान बदलने लगा। इसी घबराहट ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।
ढोंग के पीछे छिपा था ₹2000 का इनामी अपराधी
कड़ाई से की गई पूछताछ में 'विष्णु महाराज' का सारा अध्यात्म धरा का धरा रह गया। पुलिस के सामने उसने कबूला कि उसका असली नाम विक्रम है और वह राजस्थान के भीलवाड़ा का रहने वाला है। विक्रम कोई संत नहीं, बल्कि रतलाम पुलिस द्वारा घोषित 2000 रुपये का इनामी बदमाश था, जिसकी तलाश पुलिस को 2022 से थी।
क्या था पूरा मामला?
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चोरी की घटना: 9 अगस्त 2022 को रतलाम की पी एंड टी कॉलोनी निवासी आफताब अब्बासी ने अपना आयशर ट्रैक्टर चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने जांच के दौरान चोरी हुआ ट्रैक्टर एक खरीदार से बरामद कर लिया था। खरीदार से मिली जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी के रूप में विक्रम की पहचान हुई थी।
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फरारी: गिरफ्तारी के डर से विक्रम ने अपना हुलिया बदला और इंदौर आकर मंदिरों में छिप गया ताकि किसी को शक न हो।
सालों का इंतजार खत्म
रतलाम पुलिस बीते कई सालों से विक्रम की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। इंदौर पुलिस की सतर्कता और सटीक इनपुट की वजह से 4 साल पुराना यह केस अब सुलझ गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

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