August 20, 2026

धमतरी के मांदागिरी में दिखेगा विकास का नया रंग, मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली को मिलेगा पर्यटन केंद्र का रूप

धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी (सिहावा) क्षेत्र स्थित मांदागिरी पर्वत पर बनी पौराणिक मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली को अब एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्राकृतिक वादियों की गोद में बसा यह ऐतिहासिक स्थल इन दिनों एडवेंचर और ट्रेकिंग के शौकीनों के बीच तेजी से अपनी विशेष पहचान बना रहा है। मेचका गाँव के समीप मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित यह पवित्र स्थल न केवल श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

मांदागिरी पर्वत का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व

प्राकृतिक और आध्यात्मिक विरासत के दृष्टिकोण से मांदागिरी पर्वत का क्षेत्र बेहद खास माना जाता है। मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की यह तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अनोखे संगम का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा मांधाता के पुत्र थे। सुर और असुरों के प्रसिद्ध संग्राम के बाद उनकी साधना और तपस्या से जुड़ा यह स्थल सिहावा-नगरी अंचल की प्राचीन 'सप्तऋषि तपोभूमि' की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाता है।

मांदागिरी पर्वत की प्रमुख विशेषताएँ

  • प्राकृतिक संरचना और मंदिर: मांदागिरी पर्वत पर सुंदर प्राकृतिक तालाब, प्राचीन मूर्तियाँ और माता सीता सहित विभिन्न देवी-देवताओं के पावन मंदिर सुशोभित हैं।

  • ट्रेकिंग और विहंगम दृश्य: पहाड़ी की ऊँचाइयों से नीचे दिखने वाला सोंढूर जलाशय (डैम) और आसपास के सघन वनांचल का नजारा बेहद मनमोहक होता है, जो ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है।

पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं का विकास

जिला प्रशासन द्वारा मांदागिरी की अपार आध्यात्मिक और प्राकृतिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसके विकास की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस स्थल पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर पहुँच मार्ग, साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और सुरक्षा से जुड़े बुनियादी इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक बेहतरीन ट्रेकिंग और एडवेंचर स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे वनांचल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। नगरी कस्बे से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह रमणीय स्थल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म और पिलग्रिम टूरिज्म के नक्शे पर एक मुख्य आकर्षण के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।