जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन में भारी हंगामा और प्रदर्शन देखने को मिला। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात सदन की कार्यवाही मात्र 21 मिनट में ही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया, जिसके कारण सुबह 11:22 बजे ही कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
विधानसभा के बाहर कांग्रेस का पैदल मार्च और धरना
शिक्षा विभाग के फैसलों और विद्यालयों में मीडिया प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विपक्ष ने सड़क से लेकर सदन तक मोर्चा खोला। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस विधायकों ने पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला।
विधानसभा में प्रवेश के दौरान पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाए जाने पर नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। इसके विरोध में कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा के गेट के बाहर धरना दिया। प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने और जनप्रतिनिधियों को अंदर न जाने देने का आरोप लगाया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के लगभग 3 हजार विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव है और बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर भ्रष्टाचार और व्यवस्थागत कमियों के गंभीर आरोप लगाए।
मानगढ़ धाम को लेकर BAP का प्रदर्शन
सदन के बाहर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायकों ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। BAP विधायकों ने ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई। कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी दलों ने अपना धरना समाप्त किया, लेकिन आने वाले दिनों में भी सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं।
'राजस्थान ट्रीज बिल-2026' पर हस्तशिल्प उद्योग की चिंताएँ
सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले 'द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026' को लेकर प्रदेश के हस्तशिल्प और फर्नीचर उद्योग में गहरी चिंता व्याप्त है।
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प्रतिबंधित प्रजातियाँ: प्रस्तावित विधेयक में बबूल और शीशम सहित 29 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।
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कड़े दंड के प्रावधान: बिना प्रशासनिक मंजूरी के प्रतिबंधित वृक्ष काटने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और 1 साल तक के सश्रम कारावास का प्रावधान किया गया है।
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निर्यात और रोजगार पर खतरा: राजस्थान हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम के कोऑर्डिनेटर नवनीत झालानी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बबूल और शीशम को इस सूची से बाहर रखने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस कानून से सालाना लगभग 12 हजार करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले उद्योग और 7 लाख कारीगरों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
रणनीति और आगामी विधेयक
विपक्ष ने विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बनाई है, वहीं सत्तापक्ष ने भी पलटवार की तैयारी की है। इस सत्र में ट्रीज बिल के अलावा यूसीसी (UCC) और एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़ा विधेयक भी पटल पर रखा जा सकता है, जबकि जीएसटी संशोधन विधेयक पर फिलहाल राज्यपाल की स्वीकृति का इंतजार है।

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