October 29, 2026

स्कूली बच्चों को ‘संस्कार सरिता’ बांटने का मामला गरमाया, बलरामपुर में प्राचार्य की जिम्मेदारी बदली

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय स्कूल में विद्यार्थियों को विवादित पुस्तक 'संस्कार सरिता' बांटे जाने के बाद विवाद गहरा गया है। मिडिल स्कूल के बच्चों को यह पुस्तक वितरित किए जाने और उस पर आधारित परीक्षा आयोजित करने के निर्देशों से अभिभावकों में भारी आक्रोश है। विरोध को देखते हुए शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल के प्राचार्य को पद से हटा दिया है।

विवादित पुस्तक वितरण और परिजनों का विरोध

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब छात्र स्कूल से यह पुस्तक अपने घर ले गए। परिजनों ने जब देखा कि बच्चों को दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) मामले में सजा काट रहे आसाराम से जुड़ी पठन-पाठन सामग्री दी जा रही है, तो उन्होंने स्कूल प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि विद्यार्थियों को यह पुस्तक पढ़ने और इस पर आधारित परीक्षा में बैठने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही यह भी दावा किया गया कि आसाराम के अनुयायियों ने स्कूल का दौरा कर प्राचार्य के जरिए इन पुस्तकों का वितरण कराया था।

जांच के बाद प्राचार्य पदमुक्त

मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नरेंद्र निरामपुरे ने तत्काल जांच के आदेश दिए। वाड्रफनगर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) श्याम किशोर जायसवाल ने स्कूल पहुंचकर छात्रों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए। जांच टीम की शुरुआती पूछताछ में छात्रों ने पुष्टि की कि पुस्तकें प्राचार्य द्वारा ही बांटी गई थीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने प्राचार्य को पद से मुक्त कर दिया है।

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

फिलहाल शिक्षा विभाग इस बात की विस्तृत पड़ताल कर रहा है कि यह सामग्री सरकारी स्कूल तक कैसे पहुंची, इसके वितरण की अनुमति किसने दी और क्या छात्रों पर मूल्यांकन में शामिल होने का दबाव बनाया गया था। इस घटनाक्रम ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में दी जाने वाली पठन-पाठन सामग्री की निगरानी और स्क्रूटनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।