October 29, 2026

दुनिया के सबसे उम्रदराज कछुए जोनाथन के जीन में छिपे हैं लंबी उम्र के संकेत

सेंट हेलेना। दुनिया के सबसे उम्रदराज जीव माने जाने वाले 194 वर्षीय विशालकाय कछुए ‘जोनाथन’ पर बढ़ती उम्र का कोई खास नकारात्मक असर दिखाई नहीं दे रहा है। दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित ब्रिटिश द्वीप सेंट हेलेना में रह रहे जोनाथन की अत्यधिक उम्र के कारण भले ही आँखों की रोशनी चली गई हो, लेकिन उसकी सुनने और समझने की क्षमता इतनी तीव्र है कि अपना नाम पुकारे जाने पर वह तुरंत समझ जाता है कि उसके खाने का समय हो गया है। हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोधों में उसके जेनेटिक्स और डीएनए से कुछ ऐसे अनूठे सुराग मिले हैं, जो भविष्य में इंसानों की उम्र बढ़ाने और वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों से लड़ने की दिशा में क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की असाधारण कार्यप्रणाली

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, वैज्ञानिकों द्वारा जोनाथन के डीएनए पर किए गए गहन अध्ययन में यह बात सामने आई है कि उसके जीन समूह में कोशिकाओं का ऊर्जा केंद्र कहे जाने वाले ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ का कार्य बेहद असाधारण है। शोध में पाया गया कि 194 साल का होने के बावजूद जोनाथन के शरीर में माइटोकॉन्ड्रिया बिल्कुल उसी दक्षता से काम कर रहा है, जैसे किसी पाँच साल के युवा कछुए में करता है। इस रिसर्च से जुड़े पशु चिकित्सक होलिन्स ने जोनाथन की लार के नमूने जुटाकर यह अध्ययन किया, क्योंकि सुरक्षा कारणों से खून के नमूने लेने की अनुमति नहीं थी। शोधकर्ताओं स्टीफन क्लार्क और बेंजामिन वैसविल ने जब उसके जेनेटिक आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो वे उसकी कोशिकीय स्थिरता को देखकर दंग रह गए। जोनाथन के डीएनए में मौजूद जीन का यह खास समूह सूजन, उच्च ब्लड शुगर और उम्र से संबंधित अन्य गंभीर विकारों से बचाव में निर्णायक भूमिका निभाता है।

इतिहास का साक्षी और उम्र से जुड़ा अनुमान

जोनाथन के सटीक जन्म का कोई लिखित ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि उसका जन्म संभवतः 1832 के आसपास हुआ था। जब 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उसे सेंट हेलेना द्वीप लाया गया था, तब तक वह पूरी तरह विकसित हो चुका था। इस लिहाज से उसने दुनिया भर में मानवीय इतिहास के कई उतार-चढ़ाव और अनगिनत पीढ़ियों को बदलते देखा है। हालांकि, इंसानों के लिए लंबी उम्र की दवा बनाने के नजरिए से यह शोध अभी शुरुआती चरण में ही है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जोनाथन के जीन और माइटोकॉन्ड्रिया में दिखने वाली यह स्थिरता उसकी दीर्घायु के लिए किस प्रकार उत्तरदायी है।