टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित वार्षिक आम बैठक (AGM) से ठीक पहले शेयरधारक ट्रस्टों के भीतर वोटिंग का पूरा गणित राजनीतिक और व्यावसायिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस आगामी बैठक में मुख्य रूप से टाटा संस के वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एक और नया कार्यकाल दिए जाने के बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगनी है।
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल और बोर्ड का प्रस्ताव
एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल नियमानुसार आगामी 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होना है। हालांकि, कंपनी के बोर्ड ने गत 17 सितंबर को हुई एक बेहद हंगामेदार बैठक के दौरान उन्हें तीसरा कार्यकाल सौंपने का प्रस्ताव पहले ही पारित कर दिया है, लेकिन अब इस पर अंतिम और निर्णायक फैसला शेयरधारक ट्रस्टों के हाथों में है। अंदरखाने के सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कुल 7 प्रमुख ट्रस्टों की आंतरिक संरचना यह साफ दर्शाती है कि नोएल टाटा और उनके परिवार का प्रभाव इसमें बेहद मजबूत हो चुका है। इन सभी ट्रस्टों में कुल मिलाकर 36 ट्रस्टियों के पद हैं, जिनमें से अकेले 17 पदों पर नोएल टाटा और उनके परिवार (उनके बेटे नेविल, तथा बेटियां लीया और माया) का सीधा कब्जा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि उद्योगपति रतन टाटा के निधन से कुछ महीने पहले ही, यानी मई 2024 में, लीया और माया को इनमें से तीन-तीन ट्रस्टों में शामिल किया गया था।
विभिन्न ट्रस्टों में कैसी है नोएल टाटा के परिवार की ताकत?
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सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी): टाटा संस में सबसे बड़ी यानी 27.98% की हिस्सेदारी रखने वाले इस प्रमुख ट्रस्ट में कुल 6 में से 2 ट्रस्टी (यानी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी) स्वयं नोएल टाटा और उनके बेटे नेविल के पास हैं।
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आरडी टाटा ट्रस्ट: इस ट्रस्ट में नोएल टाटा, माया और नेविल की कुल 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनके अलावा अन्य ट्रस्टियों के रूप में विजय सिंह, श्रीनिवासन और तुषाद बी दुबाश शामिल हैं।
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सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट: टाटा संस में 0.1% हिस्सेदारी रखने वाले इस ट्रस्ट में नोएल, लीया और माया लगभग 60% के नियंत्रण में हैं, जबकि अन्य ट्रस्टियों में जिमी टाटा और जेएन मिस्त्री अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
शापूरजी पालोनजी ग्रुप और अन्य कंपनियों के पास मौजूद 30% वोट भी रहेंगे बेहद अहम
आगामी आम बैठक में केवल टाटा ट्रस्टों के वोट ही निर्णायक नहीं होंगे, बल्कि टाटा संस में 18% से अधिक की बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप का रुख भी इस प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। खास बात यह है कि नोएल टाटा का विवाह इसी एसपी ग्रुप के परिवार में हुआ है।
इसके अतिरिक्त, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर जैसी दिग्गज समूह कंपनियों के पास भी टाटा संस की करीब 12% हिस्सेदारी है, जिसके चलते इस पूरी वोटिंग प्रक्रिया पर देश भर के निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की पैनी नजर टिकी हुई है।

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